Dabra News : बंदी की आत्महत्या से आक्रोशित परिजनों ने किया चक्काजाम, जेल प्रशासन पर लगाए प्रताड़ना के आरोप, FIR की मांग

Amit Sengar
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Dabra News : डबरा उप जेल में बंद एक विचाराधीन बंदी ने अपनी बैरक में गुरुवार की देर शाम फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस मामले में शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। मृतक युवक के पिता एडवोकेट अजय छीपा के साथ न्यायालय के सभी वकीलों ने शव को नगर के मुख्य चौराहे पर रखकर जेल प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर और सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए चक्का जाम किया।  प्रदर्शन को देखते हुए एसडीएम प्रखर सिंह मौके पर पहुंचे और उन्हें समझाने का प्रयास किया। जेलर नरेंद्र कटारे पर मामला दर्ज किए जाने की मांग पर वकील अड़े रहे। बाद में 1 घंटे तक जाम लगाने के बाद जब समस्या का हल नहीं निकला, तो वह सिमरिया टेकरी स्थित हाईवे पर जाम लगाने पहुंच गए।

परिजनों ने लगाए आरोप

बता दें कि मृतक के पिता अजय छीपा ने प्रशासन से डबरा जेल प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बेटे की मरने की वजह फांसी नहीं बल्कि उसकी हत्या की गई है उन्होंने कहा कि विगत दिनों पहले भी डबरा की जेल में ऐसी वारदातें हो चुकी है पहले भी कुछ कैदियों के साथ ऐसा हुआ है जिस पर जेल प्रबंधक शासन तत्काल कार्रवाई करते हुए सस्पेंड करके उसकी एफआईआर करें अन्यथा वह इससे भी बड़ा आंदोलन पूरे प्रदेश लेवल पर करेंगे।

मृतक के दोस्त गुड्डू कलार ने डबरा उप जेल की पोल खोलते हुए कहा कि जेल में कैदियों के साथ जानवरों जैसा सलूक किया जाता है कैदियों से जेल में मौजूद स्टाफ द्वारा पैसों की मांग की जाती है और पैसे ना देने पर कैदियों से कठिन श्रम कार्य कराए जाते हैं गुड्डू कलार ने बताया वह किसी मामले में जेल जाकर आए हैं जिसके कारण उन्हें जेल की सारी कमियां पता है उन्होंने कहा कि कैदियों के साथ मारपीट भी की जाती है और जेल में कई तरह के नशीले जैसे सिगरेट बीड़ी गुटखा आदि पदार्थ भी पैसे लेकर पहुंचाए जाते हैं। इसमें जेल प्रबंधक की लापरवाही साफ तौर पर नजर आती है।

जेल में किसी कैदी की मौत होना यह है जेल प्रशासन की पूरी लापरवाही को दर्शाता है फिलहाल परिजनों और डबरा हाईकोर्ट बार के सभी वकीलों ने जेल प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर करने और जल्द से जल्द जेल प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर डबरा के मुख्य चौराहे पर चक्का जाम किया।
डबरा से अरुण रजक की रिपोर्ट


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मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।”

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