Dabra News : सेवानिवृत शिक्षिका ने लगाए शिक्षा विभाग के बाबू पर गंभीर आरोप, कहा – सेवापुस्तिका मांगों तो कहता है ” नहीं देता, जो हो सके वो करो”

Amit Sengar
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Dabra News : डबरा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त वृद्ध महिला ने विभाग पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला कई महीनों से परेशान है लेकिन प्रशासनिक अधिकारी महिला की फरियाद नहीं सुन रहे हैं।

यह है मामला

बता दें कि वृद्ध महिला ने डबरा में एसडीएम के समक्ष पहुंचकर अपनी परेशानियों को लेकर गुहार लगाई। दरअसल, वृद्ध महिला कुमुद गुप्ता निवासी श्री राम कॉलोनी डबरा, जो कि शिक्षा विभाग से 2019 में सेवानिवृत्त हो चुकी हैं लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा उन्हें कई महीनों से परेशान किया जा रहा है।

महिला ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि मेरी नियुक्ति दिनांक से पूर्ण वेतन एरियर का बिल संकुल केंद्र से B.O ऑफिस पहुंच गया था किंतु उस राशि का मुझे आज तक भुगतान नहीं हुआ है और ना ही मेरी अंतराल राशि दी गई है। अगस्त माह में मुझे 56,617 रुपए वेतन मिला था किंतु सितंबर 2018 में मुझे 54,798 रुपए वेतन दिया गया था। मेरे कई बार आवेदन देने पर मुझे विभाग से आश्वासन दिया गया कि अगले माह एरियर के रूप में निकलवा देंगे किंतु आज दिनांक तक मेरी राशि नहीं मिली।

महिला ने लगाए आरोप

महिला ने ये भी कहा कि मेरी सेवा पुस्तिका ऑनलाइन कराने हेतु विकास खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से B.O ऑफिस कर्मचारी प्रदीप श्रीवास्तव बाबू ने मुझसे 2 हजार रिश्वत लेकर कोष लेखा ग्वालियर पहुंचे लेकिन उन्होंने आज तक मेरी सेवा पुस्तिका को संकुल केंद्र पर वापस नहीं किया है। ना ही वह इसकी मुझे कोई पुख्ता जानकारी दे रहे हैं।

कर्मचारी ने किया अभद्र व्यवहार

महिला ने बताया कि सेवा पुस्तिका के बारे में पूछने पर प्रदीप श्रीवास्तव ने उनसे अभद्र व्यवहार किया और कहा कि वह जल गई, खो गई, मेरे पास कुछ नहीं है, जो तुमसे बन पड़े वह कर लेना। इस समस्या को लेकर महिला ने डबरा B.O को भी 20 से 25 बार अवगत कराया लेकिन उनके द्वारा भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिसकी शिकायत उन्होंने ग्वालियर जिला शिक्षा अधिकारी को भी कई बार की और 181 सीएम हेल्पलाइन पर भी उन्होंने अपनी शिकायत डाली और दूसरी बार डबरा जनसुनवाई में डबरा एसडीएम के समक्ष वह अपनी फरियाद लेकर आईं हैं।

इन सब के बाद वहां से भी बीआरसी को आवेदन दिलवाकर आश्वासन दे दिया गया। जब इस मामले के संबंध में डबरा B.O से पूछा गया तो उन्होंने भी मामले के संबंध में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। महिला ने पूरी घटना बताते हुए कहा कि अगर उनकी सेवा पुस्तिका नहीं मिली तो वह क्या करेगी उनकी फरियाद भी कोई नहीं सुनता आखिरकार, प्रदेश सरकार कहां सोई हुई है और ऐसी गंभीर समस्याओं पर क्यों सरकार का ध्यान नहीं जाता। कहने को तो राज्य सरकार नई-नई योजनाएं निकाल रही है। लेकिन सिस्टम में महिलाओं के साथ इस तरह की समस्याएं आ रही हैं इनपर कौन ध्यान देगा।

डबरा से अरुण रजक की रिपोर्ट


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मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।”

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