दर्द की इंतेहा : अंतिम संस्कार, नदी पार

डबरा, सलिल श्रीवास्तव। प्रदेश सरकार विकास के चाहे जितने दावे क्यों ना कर ले पर जमीनी हकीकत तो ग्रामीण अंचल में ही देखने को मिलती है ताजा मामला डबरा अनुभाग के खेड़ी रायमल गांव का है जहां लोगों को आज भी नदी में तैर कर मुक्तिधाम पर पहुंचना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन हो या नेता सभी से गुहार लगा चुके हैं पर अभी तक किसी ने भी समस्या का हल नहीं किया।आपको बता दें कि ग्रामीण अंचल में जगह जगह मुक्तिधाम बनाए गए हैं पर उनके लिए जगह का चयन सही नहीं किया गया यही कारण है कि ग्रामीणों को अंतिम यात्रा पर जाने और ले जाने में काफी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं।

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डबरा बिकास खंड के खेड़ीरायमल में एक ऐसा शर्मसार कर देने बाला मामला सामने आया जहां आज गाँव में बीमारी के चलते एक बुजुर्ग की मौत हो गई जिसका अंतिम संस्कार करने के लिए परिजन और ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर बीच नदी से पानी में तैरकर मुक्तिधाम लेकर पहुचे खास बात यह है कि जब अर्थी को ले जाया जाता है तो लगभग 1 किलो मीटर तक कि दूरी तय करनी पड़ती है बह भी नदी के बीचों बीच से अपनी जान जोखिम में डालकर जाना पड़ता है आज के समय में यह स्थिति नेता और प्रशासन के लिए अपने आप में शर्म की बात है।

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ग्रामीणों का कहना है कि कई बार हमने नदी के रास्ते पर रपटा बनबाने के लिए प्रशासन से लेकर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर तक को लिखित में आवेदन दे चुके है लेकिन आज तक कोई भी हम ग्रामीणों की सुध लेने नही आया।ग्रामीणों का यह भी कहना है कि अगर बरसात में किसी के घर कोई मौत हो जाती है तो हम लोगो को 3 से 4 दिन शव को घर पर रखना पड़ता है जब तक कि पानी का जल स्तर कम नही हो जाता। कुल मिलाकर जो तस्वीर सामने आई बह अपने आप में व्यवस्थाओं की पोल खोलती दिख रही है।