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पिछोर में जहां शराब की दुकान, वो है पीएम आवास योजना वाला मकान, जिम्मेदार नहीं कर रहे कार्रवाई

Written by:Amit Sengar
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शराब की इस दुकान पर शासन के आदेशों की भी खुलकर धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं। जिससे क्षेत्र में आबकारी विभाग की मॉनिटरिंग पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पिछोर में जहां शराब की दुकान, वो है पीएम आवास योजना वाला मकान, जिम्मेदार नहीं कर रहे कार्रवाई

Gwalior News : मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के पिछोर थाना क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही और अनदेखी देखने को मिल रही है, जहां पर एक प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएम आवास योजना) के तहत बने भवन में धड़ल्ले से शराब की दुकान संचालित हो रही है जबकि नियमानुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए भवन में सिर्फ भूमि स्वामी एवं उसका परिवार निवास कर सकता है फिर इस भवन में शराब की दुकान कैसे संचालित हो रही है।

बता दें कि शराब की इस दुकान पर शासन के आदेशों की भी खुलकर धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं। जिससे क्षेत्र में आबकारी विभाग की मॉनिटरिंग पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि शासन के आदेशानुसार प्रदेश में शराब की दुकानों पर अहाते नहीं चला सकते और ना हीं दुकानों के सामने बैठकर खुले में लोग शराब पी सकते हैं। लेकिन पिछोर में संचालित हो रही शराब की दुकान पर यह सारे नियम फीके नजर आ रहे हैं दुकान के बाहर लोग धड़ल्ले से शराब पीते हैं जिस पर ना तो स्थानीय प्रशासन का ध्यान है और ना हीं पुलिस का, जिससे क्षेत्र में पिछोर पुलिस की मॉनिटरिंग पर भी कई तरह के सवाल खड़े होते हैं क्योंकि अगर पिछोर पुलिस क्षेत्र में मॉनिटरिंग करती है तो फिर इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में कैसे चल रहीं हैं इससे साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थानीय प्रशासन शासन के आदेशों को लेकर किस तरह लापरवाही बरत रहा है।

जिम्मेदार नहीं कर रहे कार्रवाई

वहीं जब इस मामले को लेकर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से हमारे संवाददाता ने दूरभाष पर संपर्क साधा और बात करनी चाही तो संबंधित अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से ना लेकर इस संबंध में बात करना उचित नहीं समझा।
डबरा से अरुण रजक की रिपोर्ट

Amit Sengar
लेखक के बारे में
मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।” View all posts by Amit Sengar
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