जीत का जश्न मना रहे प्रत्याशी को रिटर्निंग ऑफिसर ने थमाया हार का सर्टिफिकेट, प्रत्याशी ने लगाए आरोप

इस पूरे मामले में प्रत्याशी भारती राघवेंद्र सिंह ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है

डबरा, डेस्क रिपोर्ट। जनपद की ग्राम पंचायत खड़ौआ में एक अजीब मामला सामने आया है, जहां जो प्रत्याशी मतदान के बाद से आज तक अपनी जीत का जश्न मना रहा था उसे आज रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा हारा हुआ घोषित कर दिया, और जिसे अपनी जीत की जानकारी भी नहीं थी, उसे बुलाकर प्रमाण पत्र दे दिया।

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जीत का जश्न मना रहे प्रत्याशी को रिटर्निंग ऑफिसर ने थमाया हार का सर्टिफिकेट, प्रत्याशी ने लगाए आरोप

आपको बता दें कि भितरवार जनपद की ग्राम पंचायत खड़ौआ में तीन प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें भारती राघवेंद्र सिंह,रश्मि बीरू रावत,जयश्री पंजाब रावत चुनाव लड़ रहे थे, मतदान वाले दिन हुई मतगणना के चलते भारती राघवेंद्र सिंह को 43 वोटों से जीता बताया गया, पर उसकी कोई भी अधिकारिक पुष्टि उसके पास नहीं थी। सिर्फ अपने आंकड़ों के आधार पर तत्काल पीठासीन अधिकारियों द्वारा बताई गई जानकारी के आधार पर अपनी जीत सुनिश्चित कर इतने दिन से जश्न मना रहा था पर जब आज सारणी बनाई गई तो पाया गया कि मतदान केंद्र क्रमांक 152 पर जय श्री पंजाब रावत जिसे पूर्व में 0 वोट मिलना बताए गए थे। उसे यहां 167 वोट मिले रश्मि बीरू रावत को 200 वोट मिले और अपनी जीत सुनिश्चित मानकर चल रहे भारतीय राघवेंद्र सिंह को जीरो मत मिला यही कारण रहा कि दूसरे नंबर पर रहने वाले रश्मि बीरू रावत जो पूर्व में 43 वोटों से चुनाव हार गए थे, उन्हें अब 124 वोटों से विजय बता दिया गया।

जीत का जश्न मना रहे प्रत्याशी को रिटर्निंग ऑफिसर ने थमाया हार का सर्टिफिकेट, प्रत्याशी ने लगाए आरोप

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इस पूरे मामले में प्रत्याशी भारती राघवेंद्र सिंह ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है, साथ ही धांधली की बात भी कही है, पर जब अधिकारियों से इस विषय में बात की गई तो उनका साफ तौर पर कहना था, कि यह गलती तात्कालिक है और इसका कोई भी अधिकारी प्रमाण नहीं है, आज जब मतों की गिनती और उन्हें सारणी बद्ध किया गया, तो यह परिणाम निकल कर आया है, इस पूरे घटनाक्रम से यह बात तय है, कि कई प्रत्याशी रात के अंधेरे में जीत हार का शिकार हुए हैं, क्योंकि मतों की गिनती करते समय पीठासीन अधिकारियों के पास ग्रामीण अंचल में उजाला कहे या लाइट की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, यही कारण रहा कि मोबाइल की रोशनी में उन्होंने मतों की गिनती की, तो कई मतों को रिजेक्ट किया जिसका खामियाजा प्रत्याशी उठा रहे हैं पर प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रत्याशी आरोप ही लगा सकते हैं उसका कोई भी हल निकलना संभव नहीं दिख रहा।