खुलकर चल रहा अंधविश्वास का बाजार, प्रसाद के रूप में शराब मंगवाता और पीता बाबा

दमोह, गणेश अग्रवाल। देश में भले ही डिजिटल युग की शुरुआत हो रही हो, सरकारें स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार के दावे और योजनाओं को धरातल पर उतारने के दावे कर रही हो, लेकिन ग्रामीण अंचलों में आज भी लोग अंधविश्वास की जंजीरों में जकड़े हुए हैं। आस्था के नाम पर तंत्र साधना और झाड़फूंक के चक्कर में गम्भीर से गम्भीर बीमारियों का इलाज़ कराने में भरोसा रखते हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र के कई इलाकों में ऐसे मामले लगातार सामने आते हैं जंहा तंत्र साधना के दरबार भरते हैं, लेकिन यहां हम जो खबर आपको दिखाने जा रहे हैं वह जरा हटकर है। वह इसलिए कि यहां झाड़फूंक कराने आने वाले लोग प्रसाद के रूप में शराब साथ लाते हैं और इलाज करने वाला कथित बाबा इलाज के दौरान दरबार में मदिरापान करता है।

नारायणपुरा पंचायत अंतर्गत ग्राम मनकपुरा में एक घर के बाहर जिले के कई ग्रामों से आये लोगो की भींड़ लगी हुई है और सब चढ़ावे में प्रसाद के साथ शराब भी लिए हुए थे। कमरे के अंदर पीले रंग के कपड़े पहने एक युवा झूमते हुए भेरवे बाबा अंश का होने का दावा कर लोगो की तकलीफ सुन रहा था और जैसे ही किसी को दर्द से राहत मिलती तो सब भेरवे बाबा, जय कालेश्वर की बोलते ओर बाबा प्रसाद में आई शराब में से एक कप शराब पी लेते। हालांकि यहां पहुंचने वाले कुछ लोगो द्वारा इस दौरान राहत मिलने की बात कही गई मगर पूर्ण राहत भी स्वीकार नहीं की गई। सबसे खास बात यह है कि बाबा कहलाने वाले इस व्यक्ति द्वारा लकवा, दर्द, भूतागति, सहित सभी रोगों से निजात दिलाने का दावा किया गया है। ग्रामीणों द्वारा मन्नत पूरी होने या राहत मिलने पर भंडारे भी किये जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार रूपसिंग ठाकुर (आदिवासी) ग्राम मनकपुरा में प्रति सोमवार बैठक का आयोजन करता है जिसमें पहुंचने वाले लोगो को एक पाव शराब ले जानी पड़ती है। ग्रामीण कनैया यादव चौरईया, भूरी बाई बंजारा सादपुर ने बताया कि उसको कुछ दर्द से निजात मिली है बाकी अगली बार बुलाया है। महेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि उसको ओर उसके बच्चों को असाध्य खुजली थी जो ठीक हो गई इसलिए आस्था है।