Damoh : अपनी समस्याओं को लेकर कांग्रेस विधायक से मिला आदिवासी समुदाय, सौंपा ज्ञापन

आदिवासी समुदाय के लोगों ने दमोह के कांग्रेस विधायक (Congress MLA) अजय टंडन (Ajay Tandon) से मिलकर वन अधिकार पट्टा पाने के लिए गुहार लगाई और ज्ञापन सौंपा।

दमोह, आशीष कुमार जैन। दमोह विधानसभा (Damoh Assembly) अंतर्गत रहने वाले अनेक आदिवासी समुदाय (tribal community) के लोगों को 25 वर्षों से वन भूमि पर निवास करने के बावजूद भी वन अधिकार नहीं मिला है। यह लोग वन अधिकार के लिए लगातार मांग कर रहे हैं। लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। ऐसे में आदिवासी समुदाय के लोगों ने दमोह के कांग्रेस विधायक (Congress MLA) अजय टंडन (Ajay Tandon) से मिलकर वन अधिकार पट्टा पाने के लिए गुहार लगाई और ज्ञापन सौंपा।

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विशेष रूप से आदिवासी समुदाय की महिलाओं ने यहां पर पहुंचकर विधायक से इस मामले पर सहयोग करने की बात कही। पीड़ित आदिवासी महिलाओं बताया कि हम हथनी पिपरिया में वन विभाग की जमीन पर 30 साल से कब्जा करे हुए हैं। लेकिन अब वन विभाग द्वारा हमें हटाया जा रहा है ताकि वह हमारी जमीन पर प्लॉट बना सके। और यही समस्या लेकर हम विधायक अजय टंडन के पास आए हैं।

तत्काल ही विधायक अजय टंडन ने उन्हें आश्वासन देते हुए संबंधित अधिकारियों से बात करने की बात कही तथा उन्हें अधिकार दिलाने के लिए विधानसभा तक में सवाल उठाकर सरकार को जगाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जब यह कानून पारित हो चुका है कि जो जहां पर काबिज है उन्हें उस भूमि का पट्टा दिया जाएगा, तो ऐसे में इन आदिवासी समुदाय के लोगों को उस कानून से अलग रखा जाना न्याय संगत नहीं है। कांग्रेस विधायक अजय टंडन का कहना है कि यह सभी हथनी गाव से आए हैं। और सभी आदिवासी हैं यह लोग वहां पर करीब 25 से 30 साल से कब्जा करे हुए हैं। और वहां पर खेती भी करते हैं। इनके पास पट्टे भी है। वहीं इन लोगों का माकान भी बना हुआ है। टंडन ने आगे कहा कि जब यह कानून बन चुका है कि जो जहां रहता है उस जमीन का हकदार वही है। और मध्यप्रदेश वन कानून में संशोधन भी हो चुका है। आज ही मैं संबंधित विभाग के सभी अधिकारियों से चर्चा करूंगा । मेरा पूरा प्रयास रहेगा कि गरीब और आदिवासी लोग अपनी जगह पर काबिज हैं। जहां खेती कर रहे हैं वहां खेती करें क्योंकि उनका अधिकार है और उनका अधिकार ने मिलना चाहिए।

वहीं जब अजय टंडन से पूछा गया कि जिन लोगों के पास पट्टे नहीं है तो उन आदिवासियों का क्या होगा। तो उनका कहना था कि ऐसे लोगों के लिए भी कानून बना है। कि अगर कोई इसे वर्षों से एक ही जगह पर काबिज है तो उन्हें पट्टा मिलना चाहिए।

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