लकड़ी की जगह कंडों से पिता का अंतिम संस्कार कर दिया पर्यावरण बचाव का संदेश

दमोह।गणेश अग्रवाल ।

जिला मुख्यालय पर रहने वाले पर्यावरण प्रेमी एक परिवार के द्वारा गोबर के कंडे से अपने पिता का अंतिम संस्कार किया गया. इस प्रकार का यह पहला मामला सामने आया है. जब एक संपन्न परिवार के द्वारा लकड़ी के स्थान पर कंडे से अपने परिजन का अंतिम संस्कार कर पर्यावरण को बचाने का संदेश दिया गया है.

दमोह के फुटेरा वार्ड नंबर 2 में रहने वाले सेन परिवार द्वारा बीते 14 साल से पर्यावरण के प्रति अलख जगाई जा रही है. इस परिवार के दीपक सेन द्वारा कदम संस्था नामक पेड़ों को लगाने वाली एक विचारधारा से जुड़कर पर्यावरण के संरक्षण का काम किया जा रहा है. इस संस्था के माध्यम से इन लोगों के द्वारा पेड़ों को लगाने और उन्हें नहीं काटने का संकल्प भी लिया गया है. ऐसे में दीपक सेन के पिता का देहांत हो गया, तो दीपक सेन सहित उनके परिवार के सदस्यों ने अपने पिता के अंतिम संस्कार में अपने संकल्प के मुताबिक लकड़ी से अंतिम संस्कार नहीं करने का मन बनाया और परिजनों की सहमति से कंडे के माध्यम से अपने पिता का अंतिम संस्कार किया. दमोह में यह पहला मामला होगा जब किसी के अंतिम संस्कार में केवल गोबर के कंडे का प्रयोग किया गया हो. इस परिवार के सहयोगीयों द्वारा बड़ी मात्रा में कंडो का इंतजाम किया गया अंतिम संस्कार कंडों से किया गया.

सेन परिवार द्वारा जब अपने पिता का अंतिम संस्कार गोबर के कंडे से करने की बात समाज के लोगों से कही गई, तो कुछ लोगों ने लकड़ी से ही अंतिम संस्कार किए जाने की परंपरा का हवाला दिया. इसके बावजूद अपने पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए दीपक सेन सहित परिजनों ने सहमति जताई और पर्यावरण प्रेमी इस परिवार द्वारा अपने पिता का अंतिम संस्कार लकड़ी से नहीं गोबर के कंडे से से किया गया. दीपक सेन ने लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक होने का संदेश भी दिया है.

दीपक सेन ने बताया कि वे अनेक वर्षों से कदम संस्था के माध्यम से पौधे लगाने का काम कर रहे हैं. ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए पेड़ की लकड़ी का प्रयोग किया जाना उनके लिए पीड़ादायक था. इसलिए इस दुखद क्षण में उन्होंने अपने पिता का परंपरा अनुसार अंतिम संस्कार पर्यावरण के लिए अच्छा माने जाने वाले गाय के गोबर के कंडो से किया है. ऐसे में उन्होंने अन्य लोगों को भी पर्यावरण बचाने का संदेश दिया है.