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मध्य प्रदेश: दमोह के स्कूल में तंबू के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर छात्र, जर्जर इमारत से डरे शिक्षक

Written by:Sanjucta Pandit
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दमोह जिले के हटा ब्लॉक के बिला कला गांव में मिडिल स्कूल की कक्षाएं जर्जर भवन के कारण तंबू के नीचे लग रही हैं। बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ रहे हैं और सभी कक्षाएं एक साथ चल रही हैं
मध्य प्रदेश: दमोह के स्कूल में तंबू के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर छात्र, जर्जर इमारत से डरे शिक्षक

मध्य प्रदेश सरकार एक ओर विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, जिसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। दरअसल, राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार कई सारी योजनाएं चलाई जा रही है, जिससे पढ़ाई की जड़े मजबूत हो और प्रदेश का हर एक बच्चा शिक्षित हो सके। हालांकि, दमोह जिले के हटा ब्लॉक के बिला कला गांव से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, उससे तो कुछ और ही प्रतीत हो रहा है। बता दें कि यहां मिडिल स्कूल की कक्षाएं बीते कई दिनों से तंबू के नीचे लग रही हैं। इसके अलावा, बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं, शिक्षक बारी-बारी से क्लास ले रहे हैं। जिसका वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ है।

मिली जानकारी के अनुसार, गांव में स्कूल भवन है, लेकिन वह पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। छत से पानी टपकता है, दीवारें कमजोर पड़ चुकी हैं और हालात ऐसे हैं कि दीवारों पर घास तक उग आई है। ग्रामीणों और शिक्षकों को डर है कि कहीं अचानक दीवार ढह न जाए और हादसा हो जाए।

मजबूर छात्र

इसी कारणवश स्कूल भवन के भीतर पढ़ाई बंद कर दी गई। परिसर में एक बड़ी पॉलिथिन को बांस और बल्लियों के सहारे तानकर तंबू बनाया दया है। जिसमें 1 से लेकर 5 तक की सभी कक्षाएं एक साथ संचालित हो रही हैं। शिक्षक एक-एक कर सभी बच्चों को पढ़ाते हैं। इससे टीचर और बच्चों दोनों को ही बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि वह बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस फैसले को लिए हैं, लेकिन इसका सीधा नुकसान बच्चों की पढ़ाई पर हो रहा है। सभी कक्षाओं के एक साथ तंबू में बैठने से पढ़ाई का माहौल बिगड़ता है। साथ ही ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है।

वहीं, मामले को लेकर गांव वालों का कहना है कि यह व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा के लिए की गई है। ग्रामीणों का कहना हैं कि बरसात के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। जैसे ही बारिश होती है वैसे ही तंबू से पानी टपकने लगता है। इस दौरान मजबूरन स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती है। फिलहाल, ग्रामीण उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार या शिक्षा विभाग जल्दी से इसका स्थायी समाधान निकाले, ताकि उनके बच्चे सुरक्षित और बेहतर माहौल में पढ़ाई कर सकें।

शिक्षा विभाग गंभीर

वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। हटा ब्लॉक के बीआरसी एम.एल. अहिरवाल का कहना है कि वह इंजीनियर के साथ भवन का निरीक्षण कर चुके हैं और स्कूल भवन बिल्कुल सही है। शिक्षक केवल दहशत की वजह से भवन का उपयोग नहीं कर रहे हैं। बीआरसी के इस बयान से अभिभावकों में रोष है। उनका कहना है कि जब दीवारों पर घास उग आई है और छत से पानी टपकता है, तो भवन को सही कैसे बताया जा सकता है।

पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले

बता दें कि यह पहला मामला नहीं है जब प्रदेश के किसी स्कूल की बदहाल तस्वीर सामने आई हो। कई जगह बच्चे जर्जर भवनों, टूटे फर्नीचर या खुले मैदान में पढ़ने को मजबूर हैं। अभी कुछ दिन पहले ही जिले के स्कूल से जुड़ा ही एक मामला सामने आया था, जहां एक ही क्लास में पढ़ाई और रसोई घर चलाई जा रही थी।

दमोह, दिनेश अग्रवाल

Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit
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