दतिया। दीपावली के दूसरे दिन अन्नकूट या गोवर्धन पूजा की जाती है. यह प्रकृति की पूजा है जिसका आरम्भ श्री कृष्ण ने किया था। इस दिन प्रकृति के आधार, पर्वत के रूप में गोवर्धन की पूजा की जाती है और समाज के आधार के रूप में गाय की पूजा की जाती है। यह पूजा ब्रज से आरम्भ हुई थी और धीरे धीरे पूरे भारत वर्ष में प्रचलित हुई। गोवर्धन पूजा पर पूर्व कैबिनेट मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने एक खास पहल शुरू की है। उन्होंंने पूजा के अवसर पर नया नवाचार किया है। हर घर से  पहली रोटी गाय के नाम देने के अभियान की शुरुआत की। उन्होंने एक नारा भी दिया “गोवर्धन का महत्व महान ,पहली रोटी गाय के नाम।”

मिश्रा ने कहा कि, हमारे त्योहार हमारी संस्कृति का पोशक होते हैं। आज गोवर्धन पूर्णरुपीन भारतीय संस्कृति का आध्यातमिक और वैज्ञानिक त्योहार भी है। हमारे यहां गांव में कहावतें भी प्रचलित होती थी। जो संपत जाने थोड़ी, तो गाय पाल या घोड़ी। एक अलग लोकोक्ति में उसका मतलब था कि गज धन, गऊ धन और माच धन और रत्न धन खान। जब आवे संतोष धन तो सब धन धूल समान। गाय एक ऐसा धन माना जाता था जो स्वास्थ क दृष्टि से भी और संपत्ति की दृष्टि से भी हमारे समजा में प्रमुखता लिए हुए था। जबसे इन चीजों से ध्यान हटा तब से हमारी कोशिश है कि पुन हम भारतीय संस्कृति से लोगों को जोड़ने का काम करें। इसलिए आज हमने कहा कि “गोवर्धन का महत्व महान ,पहली रोटी गाय के नाम।”