निलंबित अधिकारी दीपाली जाधव की बढ़ी मुश्किलें, निर्णयों पर न्यायिक जाँच की मांग, अधिवक्ता ने लिखा लोकायुक्त को पत्र

चौधरी ने शासन से माँग की है कि बागली में पद पर रहते हुए उनके द्वारा लिए गए राजस्व के प्रकरणों की जाँच हेतु कमेटी बना कर जाँच की जाए।

बागली, सोमेश उपाध्याय| देवास (Dewas) की ग्रामीण तहसीलदार दीपाली जाधव (Deepali Jadhav) पर लोकायुक्त (Lokayuky) द्वारा 2015 के प्रकरण में की गई निलंबन की कार्यवाही के बाद नया मोड़ आ गया है। आज बागली (Bagli) में वरिष्ठ अधिवक्ता व सोशल एक्टिविस्ट प्रवीण चौधरी द्वारा पत्रकार वार्ता आयोजित कर जाधव पर अनेको गम्भीर आरोप लगाए। चौधरी ने बताया कि दीपाली जाधव द्वारा बागली में भी अनेको प्रकरणों में अनिमियता की है।

चौधरी ने शासन से माँग की है कि बागली में पद पर रहते हुए उनके द्वारा लिए गए राजस्व के प्रकरणों की जाँच हेतु कमेटी बना कर जाँच की जाए। चौधरी ने अनेको गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा कि आम तौर पर लोग बोल नही पाते है,इसलिए ऐसे अधिकारियो को बल मिलता है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा लगातार भरस्टाचार के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है।ऐसे में इन अधिकारियों पर कार्यवाही उपरांत सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए। चौधरी ने बताया कि उन्होंने इस संदर्भ में लोकायुक्त को भी पत्र लिख कर बागली के प्रकरणों की पुनः जांच की अपील की है।

गौरतलब है कि देवास ग्रामीण क्षेत्र की तहसीलदार दीपाली जाधव को शासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आरोप है कि उज्जैन में नायाब तहसीलदार रहते हुए उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया और बैंक लोन की जमीन की नीलामी कम कीमत में करवाई जिसका प्रकरण लोकायुक्त में चल रहा था। उज्जैन लोकायुक्त के इंस्पेक्टर बसंत श्रीवास्तव के अनुसार उज्जैन में जाधव नायब तहसीलदार के पद पर पदस्थ थी उस समय बैंक लोन जमा नहीं करने पर एक व्यक्ति की जमीन की नीलामी प्रक्रिया चल रही थी। जमीन की शासकीय कीमत 30 लाख थी जिसे दीपाली जाधव ने अपने पति के ड्राइवर के नाम से मात्र 11 लाख में नीलाम कर कर दिया। तहसीलदार का कोर्ट में मार्च में चालान पेश किया गया था।

उल्लेखनीय है कि दीपाली जाधव पर लोकायुक्त ने 2014 में ही प्रकरण दर्ज कर लिया था लेकिन सरकारी रुकावटों के कारण चालान पेश होने में देर हुई। नायब तहसीलदार के विरुद्ध 28 मार्च 2014 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच में पाया कि जमीन नीलामी में गड़बड़ी की गई है। सांठ-गांठ कर नायब तहसीलदार ने पति रणवीर कर्नाल निवासी इंदौर के हस्ताक्षर कराए। जमीन को इंदौर के ही प्रेमचंद दांगी ने खरीदना बताया, किंतु जब जांच की गई तो बताए पते पर दांगी नहीं मिला। जांच पश्चात तीनों के विरुद्ध 13(1)डी, 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा 120बी आईपीसी के तहत केस दर्ज किया गया था।

बागली में भी रह चुकी है तहसीलदार
जाधव देवास के पूर्व बागली में तहसीलदार थी। यहाँ भी वे अक्सर विवादों में रही। कई मौकों पर वह ज्ञापन लेने कार्यालय से बाहर ही नही आती थी। उन पर जनता ने आसानी काम न करने के भी आरोप लगाए थे। बीते कुछ माह पूर्व ही जाधव को बागली से देवास स्थान्तरित किया गया था।

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