धार।राजेश डाबी । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मीडिया को कवरेज करने से नहीं रोका जाये ,वही इसी के चलते आयुक्त ने भी आदेश जारी किया है कि कोरोना वायरस की महामारी के चलते पत्रकारों को कवरेज करने से नहीं रोका जाय यदि उनके पास अधिमान्यता कार्ड, उनके संस्थान का परिचय पत्र या जनसंपर्क कार्यालय के माध्यम से जिला कलेक्टर का पास बना हो तो उन्हें कवरेज करने से नही रोका जाय। इसी के चलते पूरे जिले भर के पत्रकार अपने अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं लेकिन कहीं ना कहीं वह किसी सनकी मिजाज के पुलिसकर्मी के जिद्दी के शिकार भी हो जाते हैं ।

ताजा मामला धार जिले के बदनावर का है जहां पत्रकार नीतेश शर्मा व विश्वास सिंह पंवार कवरेज करने के लिए जा रहे थे, तभी रास्ते में दोनों पत्रकारों को पुलिस कर्मी ने रोक दिया और आगे नहीं जाने दिया क्योंकि वह अव्यस्थित हो रही लोगों की भीड़ का कवरेज कर रहे थे तभी उस पुलिसकर्मी के साथ तू तू मे मे होने लगी ,वही पत्रकार ने अपना परिचय पत्र भी दिखाया किंतु पुलिसकर्मी नहीं माना और अपनी जिद पर कायम रहा इस बीच पत्रकार नीतेश शर्मा ने अपने मोबाइल फोन से जब एसडीएम नेहा साहु से चर्चा की तो उन्होंने पुलिस कर्मी को निर्देश दिये कि फोटो खींचने के लिए मत जाने दो इन दोनों पत्रकारों में से एक को रोक लो और एक को जाने दो और फिर भी नहीं माने तो दो चार लठ बजा दो। ऐसा कहकर फोन काट दिया ।उधर पत्रकार मैडम मैडम बोलता रहा लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया। दूसरी बार पत्रकार ने फिर फोन लगाया तो उधर से मैडम ने कहा कि जरा जरा सी बात के लिए क्या बार-बार फोन लगा देते हो मुझे परेशान ना करें ।

जब यह बात सोशल मीडिया के माध्यम से जिले भर के पत्रकारों को पता चली तो जिला मुख्यालय के प्रेस क्लब अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार तथा जिला भाजपा के सह संभागीय प्रवक्ता ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने इस संबंध में जिला कलेक्टर से चर्चा की ओर आडियो सुनने के बाद एसडीएम  नेहा साहु को शोकाज नोटिस जारी किया है। वही पत्रकार साथियों का कहना है कि एसडीएम को तुरंत कार्रवाई करते हुए उनसे माफी मांगने का कहा जाए या उन्हें तत्काल पद से निलंबित किया जाए ,इस बारे में वरिष्ठ अधिकारियों और PRO से पत्रकारों की चर्चा भी जारी है ।। वहीं क्षेत्र के सभी पत्रकार संघ ने एसडीएम के इस आचरण की निंदा की है और वरिष्ठ अधिकारियों से कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की बात कही तथा कुछ पत्रकारों ने अपने केमरों का और कलम को 1 दिन के लिए लॉक डाउन करने की बात कही है ।सभी का कहना है कि पत्रकार अपनी जान की परवाह न करते हुए जनहित में शासन को सहयोग प्रदान करने में जुटा हुआ है।

एसडीम ने कलेक्टर को पत्र लिख किया खेद प्रकट

लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रेस की भूमिका और उनके महत्व को मैं अच्छी तरह समझती हूं।कोरोना संक्रमण के फैलाव रोकने के लिए पूरा शासकीय आमला लगभग 18 से 20 घंटे प्रतिदिन कार्य कर रहा है। प्रेस कर्मी के कार्ड दिखाए जाने पर उनके कार्य करने में बाधा नहीं डालने के निर्देशों से मैं भलिभांति अवगत हूं। जब स्थानीय पुलिसकर्मियों द्वारा शुक्रवार कोप्रेस कर्मी को कार्ड दिखाए जाने के बावजूद रोका गया तब उनमें से किसी ने मुझे कॉल किया।मेरे पास संबंधित पत्रकार का नंबर सेव नहीं था।इन परिस्थितियों में मेरे द्वारा आमजन को लॉकडाउन के सख्ती से पालन करवाने की दृढ इच्छा सख्त शब्दों के चयन का कारण बनी। हांलाकि मुझे ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना था,पर काम का दबाव और लगातार कॉल लेने की मजबूरी में यह घटित हुआ।मुझे इस घटनाक्रम पर खेद है।