एमपी में कर्जमाफी के ऐलान के बीच एक और किसान ने दी जान, प्रशासन में हड़कंप की स्थिति

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भोपाल।

मध्यप्रदेश में सरकार बदली, कांग्रेस ने वादे के मुताबिक कर्जमाफी का भी ऐलान कर दिया है, इसकी प्रक्रिया भी शुरु हो चुकी है, बावजूद इसके प्रदेश में किसानों की आत्महत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है।  खंडवा और शाजापुर के बाद गुना जिले में एक किसान ने जहरीला पदार्थ पीकर जान दे दी। आत्महत्या के पीछे कर्ज का कारण सामने आ रहा है।सरकार के कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया के विधानसभा क्षेत्र से जुड़े इस मामले में अब प्रशासन में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल प्रशासन ने पीड़ित परिवार को 15 हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराई है। 

दरअसल, जिले के बमोरी थाना क्षेत्र के मनीखेड़ा गांव में किसान नागजी भील ने जहर पीकर जान दे दी।  बताया जा रहा है कि मृतक किसान के पास गांव में ही 10 बीघा जमीन थी, जिसे हर साल साहूकारों को किराए पर देकर किसान अपना व परिवार का पेट पालता था। बीते साल भी नागजी ने अपनी ज़मीन प्रमेन्द्र भार्गव नाम के साहूकार को खेती के लिए किराए पर दी थी, लेकिन आरोपी प्रमेन्द्र भार्गव ने मृतक की ज़मीन को बैंक में गिरवी रखवा कर 30 हज़ार रुपये का लोन स्वीकृत करवा लिया था। आरोपी ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा किया और किसान की ज़मीन को गिरवी रखवा दिया।

इसी बीच बैंक का नोटिस भी  नागजी के घर पहुंच गया। नागजी भील ने उक्त मामले की शिकायत बाकायदा शपथ पत्र देकर बमोरी थाने में की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार कर्ज़ के बोझ तले 48 वर्षीय नागजी ने जहर पीकर आत्महत्या कर ली।वही सरकार के कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया के विधानसभा क्षेत्र से जुड़े इस मामले में अब प्रशासन में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। किसान की मौत के बाद जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवार को 15 हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराई है। फिलहाल मामले की जांच की बात कही जा रही है।

इसके पहले शाजापुर और खंडवा में किसान ने दी थी जान

बता दे कि बीते दिनों ही शाजापुर जिले के किसान नारायण रघुवंशी ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जान दे दी थी।  नारायण पर ICIC बैंक का 3 लाख का कर्ज था। वही खंडवा के पंधाना में भी कर्ज से परेशान होकर एक किसान ने जुवान सिंह/ पिता गुलाब सिंह उम्र 45 वर्ष आदिवासी ने अपने खेत पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी । जुवान सिंह ने भी बैंक से लगभग तीन लाख कर्ज लिया था।वह सूखे औऱ फसल बर्बादी से बेहद परेशान था।