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गुना।विजय जोगी।

 बिना पोषण के कैसे होगी पढ़ाई। जी हां स्कूली छात्रों के पोषण के लिए शुरू की गई दूध वितरण योजना गोदामों में पड़ी धूल खा रही है। जिसकी बानगी गुना जिले में देखने को मिली।

जब एमपी ब्रेकिंग ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि यह दूध स्कूली छात्रों को पिलाया तो जाना था। लेकिन स्कूली छात्रों को यह दूध कभी पीने को मिला ही नहीं। इस बारे में अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेनी चाही तो कुछ अधिकारी प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आए तो कुछ एक दुसरे पर टालमटोल करते नजर आये। इस योजना का लाखों रुपये की राशि की निकासी भी हो गई लेकिन इसका लाभ जिन छात्रों को मिलना था उन्हें मिला ही नहीं। और अभी भी यह दूध के कट्टे बंटने के इंतजार में धूल खा रहे हैं।

गुना जिले के चाचौड़ा बीआरसी में भी दूध के कट्टे भरे पड़े हैं। कई कट्टे सालों पुराने हैं जिनकी एक्सपायरी डेट भी निकल चुकी है। ऐसे कट्टों पर दोबारा मार्कर पेन से नई तारीख डाल दी गई है। जिससे यह लगे कि यह स्टॉक नया है। जब हमारी टीम ने स्कूलों में पहुंचकर बच्चों से पूछा तो बच्चों का जवाब मिला उन्होंने कभी दूध ही नहीं पिया। शासन की महत्वपूर्ण योजना में जमकर चपत लगाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया। जिसके कारण यह योजना न सिर्फ अधर में लटकी बल्कि लाखों रुपए के बजट से खरीदी हुई और बच्चों ��े पोषण का ध्यान रखने वाला प्रशासन अनजान हो गया। अब देखना यह है कि इस पड़ताल के बाद जिला प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।