यूरिया वितरण पर कृषि अधिकारी का अजीबोगरीब बयान, पंगत गाथा के बहाने किसानों का उड़ाया मजाक

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गुना। यूरिया के प्रदेशव्यापी संकट को लेकर कमलनाथ सरकार जहां चिंता जाहिर कर रही है, वहीं उनके मातहत किसानों की बेबसी का मजाक उड़ाने पर आमादा हैं। कड़ाके की सर्दी में रात-रात भर यूरिया केंद्र के बाहर खड़े होकर यूरिया की जुगाड़ करने में जुटे अन्नदाता की परेशानी किसी को दिखाई ही नहीं देती। यूरिया के लिए लम्बी कतारों में खड़े किसान भूख लगने पर लाइन में ही दो रोटी खाकर गुजर बसर कर रहे हैं, लेकिन ये नजारा भी अधिकारियों को दिखाई नहीं देता। दिखाई देता है तो बस खुद का आराम जो सुबह 10 .30 बजे से शाम 5.30 बजे तक ऑफिस में बैठकर काटना पड़ता है। 

जिले में यूरिया के लिए लगातार संकट गहराया हुआ है। आये दिन किसान आंदोलन कर रहे हैं, चक्काजाम कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी किसानों की परेशानी को अलग ही अंदाज़ में बयां कर रहे हैं। गुना जिले के कृषि उपसंचालक अशोक उपाध्याय से जब यूरिया के संकट को लेकर जवाबतलबी की गई तो उन्होंने “पंगत गाथा ” के बहाने किसानों का मजाक उड़ा दिया। कृषि अधिकारी ने किस्सा सुनाते हुए कहा कि “जैसे गाँव में पंगत होती है और लोग पूड़ी खाने बैठते हैं तो परोसने वाले से पूड़ी बराबर बांटने की बजाए शुरूआती लोगों द्वारा अकेले ही हजम करने की कोशिश की जाती है, वैसे ही हालात यूरिया के भी हैं। यूरिया पर्याप्त मात्रा में है लेकिन किसान व्यवस्था बिगाड़ रहे हैं। जितनी जरूरत है उससे ज्यादा यूरिया स्टॉक किया जा रहा है जो गलत है। कृषि अधिकारी की इस अजीबोगरीब बयानबाज़ी ने किसानों के ऊपर जले पर नमक छिडक़ने जैसी बात की है। 

कृषि अधिकारी से जब पूछा गया की यूरिया के साथ साथ डीएपी की भी बोरी किसानों को जबरन सौंपा जा रहा है तो उन्होंने कहा की जिन किसानों ने देर से बुवाई की है उन्हें डीएपी दिया जा रहा है सभी को नहीं। 

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