राम मंदिर : इस कारसेवक ने कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि राम मंदिर के संकल्प पूरा होते देखेंगे

गुना, विजय कुमार जोगी

बुधवार यानि कल 5 अगस्त को करोड़ो भारतीयों का सपना पूरा होने जा रहा है. अयोध्या में भगवान राम के मंदिर का शिलान्यास होने जा रहा है, जिसको लेकर देश भर में खुशी का माहौल है। इस मौके पर प्रदेश भर के सभी हनुमान मंदिरों में भारतीय जनता पार्टी द्वारा अखंड रामायण का पाठ किया जा रहा है।

मध्य भारत प्रांत 47 हजार कारसेवक हुए थे शामिल

मीडिया से चर्चा करते वक्त पूर्वा भाजपा जिलाध्यक्ष राधेश्याम ने बताया कि प्रभु श्रीराम के आदर्श कारसेवकों की प्रेरणा बनकर ऊर्जा का संचार कर रहे थे। कारसेवा के दौरान ‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ नारा गूंजता, कारसेवक उतने ही जोश के साथ आगे बढ़ जाते थे। मध्य भारत प्रांत से 47 हजार कारसेवक शामिल हुए थे, जो अलग-अलग क्षेत्रों से कभी ट्रेन, तो कभी पैदल चलकर 10 से 15 दिनों में अयोध्या पहुंचे थे। इसके बाद सभी ने राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था। हम सौभाग्यशाली हैं कि उसी शरीर और आंखों से 28 साल पहले लिया गया संकल्प पूरा होते देखेंगे। इन क्षणों को व्यक्त करने मानो शब्द ही नहीं रह गए हैं।

गुना से 300 से ज्यादा कारसेवक पहुंचे थे अयोध्या

दरअसल, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष राधेश्याम पारीक 1992 में राम मंदिर निर्माण के लिए हुई कारसेवा का हिस्सा रहे थे। उन्होंने तब मध्य भारत प्रांत के कारसेवा प्रमुख का दायित्व निभाया था, जिसमें इंदौर, भोपाल,  उज्जैन,  खंडवा,  जबलपुर,  रीवा,  सतना आदि जिलों के 47 हजार कारसेवक शामिल हुए थे। गुना जिला (तब अशोकनगर जिला भी गुना का हिस्सा था) से भी 300 से ज्यादा कारसेवक अयोध्या पहुंचे थे। उस समय लग रहा था कि हर कोई प्रभु श्रीराम के काज से जुड़ने को आतुर था। श्रीराम के नाम ने लोगों के मन से भय दूर कर दिया था कि हमारा, घर-परिवार का क्या होगा! यही वजह थी कि कारसेवक पूरे जोश के साथ आगे बढ़ रहे थे।

पैदल भी किया है सफर

आगे उन्होंने कहा कि इस यात्रा में कभी ट्रेन तो कभी पैदल ही सफर तय करना पड़ा। दस से पंद्रह दिनों में कारसेवक अयोध्या पहुंचे, जहां राम मंदिर आंदोलन से जुड़े वरिष्ठजनों का मार्गदर्शन मिला। आठ से दस दिन तक अयोध्या में ही रहे, जहां कारसेवकों के लिए समाज के योगदान से ट्रालियों से सब्जी ट्रकों से पूरिया आती थीं। जिस दिन कारसेवा को पूरा होना था, उस दिन कारसेवकों ने सरयू नदी में स्नान किया और आगे बढ़े। देखते ही देखते ही श्रीराम की जन्मस्थली पर रामलाल का अस्थाई मंदिर बन गया। इसके बाद कारसेवकों द्वारा राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया।

लंबा संघर्ष और इंतजार का अंत

पारिक बताते हैं कि देश के आजाद होने के बाद से ही पूर्वजों का श्रीराम की जन्मस्थली पर राम मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष शुरू हो चुका था। कारसेवा को ही लगभग 28 साल हो चुके हैं, लेकिन अब लंबा संघर्ष और इंतजार का अंत हो रहा है। पांच अगस्त को प्रधानमंत्री स्वयं राम मंदिर निर्माण के शुभारंभ मौके के साक्षी बन रहे हैं, तो हम सब का दायित्व बनता है कि इस दिन घर-घर में दीप प्रज्ज्वलित कर रामोत्सव मनाएं। यह पल निश्चित ही अविस्मरणीय और निशब्द करने वाला होगा।