इस नेता को मिली मेयर की कुर्सी तो सिंधिया के गढ़ में बढ़ेगा पचौरी का कद

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ग्वालियर। महापौर से सांसद बने वेवेक नारायण शेजवलकर ने एक पद एक व्यक्ति की पार्टी की वैचारिक लाइन पर चलते हुए आज महापौर पद से इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद ये पद रिक्त हो गया है। अब पद रिक्त होने के बाद से कांग्रेस की उम्मीद जाग गई है क्योंकि सत्ता में उनकी सरकार है और सरकार को ही नियुक्ति करना है। इस सूची में सबसे ऊपर नाम नेता प्रतिपक्ष कृष्णराव दीक्षित का नाम सबसे ऊपर है और यदि ऐसा होता है सिंधिया के गढ़ में सुरेश पचौरी गुट की ताकत बढ़ जाएगी। 

महापौर के इस्तीफे के बाद आज शहर के साथ साथ नगर निगम के गलियारों में यही चलती रही कि अगला महापौर कौन होगा। चूँकि नगरीय निकाय चुनावों को 6 महीने से कम का समय बचा है ऐसी स्थिति में  नगर निगम 1956 की धारा 21 (2) की उपधारा (1) के तहत महापौर का रिक्त पद शक्तियां और कर्तव्य किसी निर्वाचित पार्षद को सौंपे जायेंगे और इसका फैसला सरकार करेगी। खास बात ये भी कि यदि महापौर का पद आरक्षित है तो आरक्षित पार्षद को और अनारक्षित है तो अनारक्षित पार्षद को ही मिलेगा। इस लिहाज से नेता प्रतिपक्ष कृष्णराव दीक्षित इसके लिए बिलकुल फिट बैठते है। नगर निगम परिषद् में वोंग्रेस के चुने हुए 10 पार्षदों में वे सबसे वरिष्ठ और तीन बार के पार्षद हैं। एलएलएम तक पढ़े कृष्णराव दीक्षित इस समय नेता प्रतिपक्ष भी हैं। लेकिन यदि वे महापौर बनाये जाते है तो सिंधिया के गढ़ में सुरेश पचौरी का कद भी बढ़ जायेगा। क्योंकि कृष्णराव दीक्षित पचौरी गुट के नेता माने जाते है। हालाँकि उनके नाम पर मुहर बिना ज्योतिरादित्य की अनुमति के नहीं लग सकती । गौरतलब है ग्वालियर दक्षिण विधायक प्रवीण पाठक पचौरी गुट के ही नेता है। 

एक चर्चा ये भी शहर में

विवेक शेजवलकर के महापौर पद से इस्तीफे को भले ही भाजपा के लोग एक पद एक व्यक्ति की बात का अनुसरण बता रहे हैं। लेकिन राजनीतिक गलियारों में  इसे लेकर एक दूसरी ही चर्चा है। लोग बातें कर रहे हैं कि पीले और गंदे पानी की समस्या को लेकर महापौर पर दबाव बढ़ रहा था, विपक्ष लगातार इस्तीफे की मांग कर रहा था । इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष कृष्णराव दीक्षित ने भी दो दिन पहले ही महापौर को पत्र लिखकर परिषद का सम्मेलन बुलाने की मांग की थी जिससे पानी की समस्या पर सदन में चर्चा हो सके। इसीलिए इन सब बातों से बचने के लिए विवेक शेजवलकर ने महापौर पद से इस्तीफा दिया है। बहरहाल यदि ये पद नेता प्रतिपक्ष कृष्णराव दीक्षित या किसी अन्य कांग्रेस पार्षद को महापौर का पर मिलता है तो ये उसके लिए कांटों भरे  ताज से कम नहीं होगा।