लगातार चौथी बार हारे अशोक सिंह, वोट प्रतिशत घटा, हार का अंतर बढ़ा

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ग्वालियर। ग्वालियर लोकसभा सीट से चुनाव लड़े कांग्रेस उम्मीदवार अशोक सिंह लगातार चौथी बार चुनाव हार गए। इस  बार उन्हें  1 लाख 46 हजार 842 वोटों से बड़ी हार का सामना करना पड़ा। ग्वालियर सीट से भाजपा के विवेक नारायण शेजवलकर ने जीत दर्ज की।

दरअसल अशोक सिंह का परिवार विशुद्ध कांग्रेसी परिवार है। उनके दादाजी स्वर्गीय कक्का डोंगर सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे वे गांधी जिनके सहयोगी रहे। अशोक सिंह के पिता स्वर्गीय राजेन्द्र सिंह अर्जुन सिंह सरकार में मंत्री रहे। ये परिवार हमेशा से सिंधिया विरोधी और अर्जुन सिंह दिग्विजय सिंह समर्थक परिवार रहा। अशोक सिंह ने जब राजनीति में कदम रखा तो सिंधिया विरोधी परिवार से होने का हमेशा नुकसान उठाना पड़ा। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण है उनकी लगातार चौथी हार। 2007 में जब ग्वालियर सांसद कांग्रेस के रामसेवक बाबूजी ओपरेशन दुर्योधन में फंसे और उनको इस्तीफा देना पड़ा तो उप चुनाव में कांग्रेस ने अशोक सिंह को टिकट दिया लेकिन भाजपा की यशोधरा राजे से अशोक सिंह को 36474 वोट से हरा दिया। यशोधरा राजे को 213583 वोट यानि 37.43 प्रतिशत वोट मिले और अशोक सिंह क9 177109 यानि 31.04 प्रतिशत वोट मिले। 2009 के चुनाव में भाजपा ने यशोधरा को फिर उतारा तो कांग्रेस ने अशोक सिंह को रिपीट किया लेकिन अशोक सिंह ये चुनाव 26591 वोट से हार गए  यशोधरा राजे को 252314 यानि 43.19 प्रतिशत वोट मिले और अशोक सिंह को 225723 यानि 38.64 प्रतिशत वोट मिले। 2014 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस ने अशोक सिंह को टिकट दिया और भाजपा ने नरेन्द्र सिंह तोमर को। इस बार भी अशोक सिंह 29699 वोटों से हार गए। नरेन्द्र सिंह तोमर को 44.68 प्रतिशत के साथ 442796 वोट मिले और अशोक सिंह को 41.68 प्रतिशत के साथ 413097 वोट मिले। 

इस बार का परिणाम भी भाजपा के पक्ष में गया। खास बात ये है कि इस बार अशोक सिंह को टिकट देने में कांग्रेस को बहुत समय लगा। ज्योतिरादित्य सिंधिया नहीं चाहते थे अशोक सिंह को ग्वालियर से टिकट दिया जाये इसके लिए उन्होंने जिला कांग्रेस कमेटी के माध्यम से एक बार खुद का और एक बार अपनी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे के नाम का प्रस्ताव राहुल गांधी के पास भेजा लेकिन सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, अजय सिंह, अरुण यादव सहित अन्य वरिष्ठ कांग्रेसियों ने अशोक सिंह के नाम की सिफारिश की और राहुल गांधी ने और अपने वीटो का प्रयोग करते हुए अशोक सिंह को टिकट दिया लेकिन ग्वालियर से भाजपा प्रत्याशी महापौर विवेक नारायण शेजवलकर ने अब तक के सबसे बड़े अंतर 1 लाख 46 हजार 842 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया। विवेक शेजवलकर को 52.4 प्रतिशत के साथ 627250 वोट मिले और अशोक सिंह को 40.0 प्रतिशत के साथ 480408 वोट मिले और वो चुनाव हार गए। 

भितरघात ने ज्यादा नुकसान पहुंचाया

अशोक सिंह को सबसे ज्यादा नुकसान भितरघात ने पहुंचाया। दिग्विजय खेमे का होने के कारण उन्हें सबसे पहले टिकट लेने के लिए मशक्कत करनी पड़ी उसके बाद लगभग 85 प्रतिशत सिंधिया समर्थक नेता गुना शिवपुरी निकल गए। क्योंकि इस सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव लड़ रहे थे। अब बचे हुए 15 प्रतिशत कांग्रेसियों ने अशोक सिंह के लिए प्रचार किया तो उनमें से बहुत से वरिष्ठ कांग्रेसी घर से ही निकले।हालांकि राहुल गांधी और सिंधिया ने एक एक सभा अशोक सिंह के लिए की लेकिन फिर भी नतीजा ये हुआ कि चौथी बार फिर अशोक सिंह हार गए। अब इस हार के साथ ही अशोक सिंह के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लगने लगे हैं।