बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला : फैसले से पहले सामने आया जयभान सिंह पवैया का बड़ा बयान

यदि जेल के अंदर रहे तो भी रामजी का काम होगा और बाहर रहे तो राष्ट्र का कार्य होगा। लेकिन जो भी होगा मैं उसमें गौरव की अनुभूति करूँगा।

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ग्वालियर, अतुल सक्सेना। कट्टर हिंदू वादी नेता, भाजपा के पूर्व मंत्री एवं बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया (Jaibhan Singh Powaiya) ने मंगलवार को लखनऊ रवाना होने से पहले ग्वालियर में कहा कि “मैं पूरी तैयारी के साथ जा रहा हूँ। बस इतना ही कहूंगा कि मरुँ तो भगवा में लिपट कर जाऊँ। सलाखों के भीतर रहे तो भी रामजी का काम होगा और बाहर रहा तो राष्ट्र का काम होगा।

अयोध्या (Ayodhya) में बाबरी ढांचा गिराए जाने के 28 साल पुराने मामले में सीबीआई की विशेष अदालत (CBI special court) 30 सितंबर को लखनऊ में फैसला सुनायेगी। फैसला आने के दौरान मामले में सभी आरोपियों को हाजिर होने के लिये कोर्ट ने तलब किया है। मप्र से इसमें दो बड़े नेता पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और पूर्व मंत्री एवं बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया के नाम शामिल हैं। सुनवाई के दौरान अदालत में हाजिर होने के लिए जयभान सिंह पवैया सड़क मार्ग से मंगलवार को रवाना हो गए। अपने आवास सेवा पथ से पवैया के समर्थकों ने जय श्री राम के उद्घोष के साथ उन्हें आत्मीय विदाई दी।

जब मरुँ तो भगवा में लिपट कर मरुँ-पवैया

मीडिया से बात करते हुए हमेशा रौबीले अंदाज में बात करने वाले कट्टर हिंदू वादी नेता जयभान सिंह पवैया ने कहा कि कल सीबीआई की विशेष अदालत लखनऊ में 28 साल पुराने मामले में फैसला सुनायेगी। मुझे भी हाजिर रहने का आदेश मिला है इसलिए मैं लखनऊ जा रहा हूँ और कल अदालत में हाजिर रहूँगा। पवैया ने कहा कि मैं पूरी तैयारी के साथ जा रहा हूँ। फैसला आने तक कोई टिप्पणी करूँगा नहीं। लेकिन इतना ही कहूंगा कि अब जीवन की अंतिम कामना मैंने बना ली है कि जब मरुँ तो भगवा में लिपट कर मरुँ। इसलिए सलाखों के भीतर रहूँ या बाहर ये चीजें गौण हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि जेल के अंदर रहे तो भी रामजी का काम होगा और बाहर रहे तो राष्ट्र का कार्य होगा। लेकिन जो भी होगा मैं उसमें गौरव की अनुभूति करूँगा।

काशी मथुरा का भी उद्धार होना चाहिए

पवैया ने कहा कि 110 करोड़ हिंदुओं के मन में एक कसक तो बार बार उमड़ रही है कि रामजी के मंदिर का सपना तो लंबे संघर्ष के बाद प्रभु के आशीर्वाद से पूरा हुआ है लेकिन 17 वी शताब्दी में भगवान श्रीकृष्ण की जन्म भूमि पर लाल पत्थर की इमारत खड़ी करके औरंगजेब ने जो हमारे परमपिता की अवतरण स्थली को कलंकित किया, काएँगी विश्वनाथ भगवान मंदिर पर ज्ञान वापी के नाम से हिंदुओं को चिढ़ाने के लिये उस समय अपमान किया। इनका भी अयोध्या की तरह उद्धार होना चाहिए। रामजी की कृपा से उनकी जन्म भूमि का उद्धार हुआ हम चाहते हैं कि मथुरा काशी का भी सपना हिंदू समाज का पूरा होना चाहिए।