निगम के दावे खोखले, गंदगी से पटे पड़े शहर के छोटे बड़े नाले, कई जगह चौड़ाई केवल 3-4 फीट

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ग्वालियर । शहर में प्री मानसून की बारिश अभी तक दो से तीन बार हो चुकी है और मानसून आने में ज्यादा समय नहीं है  लेकिन नगर निगम प्रशासन की लापरवाही और निष्क्रियता के चलते अभी तक शहर के छोटे बड़े नाले और स्वर्ण रेखा नदी की सफाई नहीं हो पाई है। हालात ये है कि ये नाले गंदगी से पटे पड़े हैं । गंदगी और अतिक्रमण के चलते कई जगह तो नालों की चौड़ाई 3-4फीट रह गई है जिसके चलते बारिश के दौरान बाढ़ जैसे हालात बनने का डर पैदा हो गया है।

ग्वालियर की पुरानी ड्रेनेज व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है । तीन दशक पहले तक जहां ग्वालियर के शहरी क्षेत्र में वर्षा के बाद जल भराव या बाढ़ की स्थिति नहीं बनती थी वहीं आज प्रशासनिक अनदेखी और लापरवाही की वजह से आज कुछ घंटों की बारिश में ही कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं।हर साल नगर निगम बारिश पूर्व नालों की सफाई करता है लेकिन इस बार  मानसून सर पर है परंतु नगर निगम अभी तक नदी नालों की सफाई नहीं करा सका है । नाले गंदगी,मलबे और कचरे से भरे पड़े हैं। कई जगह तो नालों की चौड़ाई मात्र 3 से 4 फीट ही रह गई है जो बारिश में मुसीबत बन सकती है।  नगर निगम परिषद में नेता प्रतिपक्ष कृष्ण राव दीक्षित ने भाजपा शासित नगर निगम परिषद पर आरोप लगाते हुए कहा है कि नगर निगम में बंदरबाट चल रही है । भ्रष्टाचार चरम पर है प्रशासन के अधिकारी मनमानी कर रहे है मानसून सर पर है लेकिन स्वर्ण रेखा और नालों की सफाई की किसी को चिंता नहीं है । उन्होंने कहा कि शहर में यदि बारिश में जल भराव होता है तो उसके लिए पूरी तरह से निगम अधिकारी जिम्मेदार होंगे । हालांकि उधर नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि हमारी कोशिश है कि इस बार बारिश के मौसम में कहीं जलभराव या बाढ़ जैसी स्थिति ना बने इसके लिये नदी नालों की सफाई जारी है और जल्द काम पूरा हो जायेगा । नगर निगम के अपर आयुक्त नरोत्तम भार्गव ने दावा किया कि स्वर्ण रेखा नदी और अन्य नालों की सफाई का केवल 30 फीसदी कार्य बकाया हैं जो 3 से 4 दिन में निबट जायेगा। श्री भार्गव का कहना है कि निचले इलाकों और बाजारों में बारिश में पानी भरने वाले स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है यदि जलभराव होता है तो अन्य साधनों से उस पर काबू पाया जायेगा । बहरहाल नगर निगम हर साल बाढ़ जैसे हालात नहीं बनने देने के दावे करता है लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते निचले इलाकों में पानी भर जाता है और लोग परेशान होते हैं अब देखना ये होगा कि इस बार निगम का  दावा कितना पूरा होता है।