दीवारों पर स्वच्छता जमीन पर गंदगी, कैसे बनेंगे NO.1?

एक ओर आलाधिकारी कोरोना संक्रमण को लेकर चिंतित हैं वहीं Poor Waste Management से बढ़ते हुए इन्फेक्शन के खतरों को पूरी तरह नज़रंदाज़ कर रहे हैं।

डबरा, गौरव शर्मा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद गांधी के स्वच्छ भारत (Swachh Bharat) का सपना देखा था। उन्होंने इस सपने को पूरा करने के लिए भारत के हर एक नागरिक से योगदान मांगा था और हर्षोल्लास के साथ स्वच्छ भारत अभियान प्रारंभ किया था। इतना ही नहीं मोदी ने वर्ष 2019 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 150वें  जन्मदिन पर स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की जिसके तहत भारत को “गार्बेज फ्री” बनाना लक्ष्य रखा। डबरा ने भी इसपर काम शुरू किया, शहर में भी सरकारी दीवारों पर लाखों रुपए का रंगरोगन कर डबरा नगर पालिका द्वारा स्वच्छता अभियान शुरू किया गया, स्वच्छता की जागरूकता के स्लोगन लिखे गए लेकिन जमीनी हकीकत देखते हुए साफ समझ आता है कि डबरा में न तो अभी तक स्वच्छता अभियान की शुरुआत हुई है न ही स्वच्छता मिशन 2.0 (Swachh Bharat Mission 2.0)  की ।

आइये आपको दिखाते हैं डबरा की तस्वीर, इस समय डबरावासी (Dabra News) गंदगी की समस्या से बुरी तरह से परेशान हैं। सड़कों पर गंदगी, नालियों में गंदगी, पानी भराव से गंदगी, आवारा पशुओं द्वारा की गई जगह जगह गंदगी।  सफाई तो मानो शहर की तरफ से मुंह मोड़ कर बैठ गई है।

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दीवारों पर स्वच्छता जमीन पर गंदगी, कैसे बनेंगे NO.1? दीवारों पर स्वच्छता जमीन पर गंदगी, कैसे बनेंगे NO.1?

सबसे हैरानी की बात तो यह है कि प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत के सपने की अगर कोई सबसे ज्यादा अनदेखी कर रहे हैं तो वो हैं नगरपालिका अधिकारी एवं कर्मचारी, जिन्हें न तो लोगों द्वारा की गई शिकायतें दिखती हैं न ही चारों तरफ फैली गंदगी। आलम यह है कि बेबस लोग मजबूरन गंदगी के आस पास रहने को मजबूर हैं। पर सवाल यह भी उठता है जब चारों तरफ इतनी गंदगी का फैलाव है तो लाखों रुपए स्वच्छता सर्वेक्षण के विज्ञापनों पर बरबाद क्यों किए जा रहे हैं।

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बात करें स्वच्छ भारत मिशन 2.0 की तो इसका मुख्य उद्देश्य शहरों को कचरा मुक्त बनाना था, इसके अलावा उपयोग किए जा चुके पानी (black and grey water) के प्रबंधन के लिए भी उचित कदम उठाने थे। पर शहर को देखते हुए लगता है कि SBM 2.0 का मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग जैसे नगरपालिका डबरा तक अभी तक पहुंच नहीं सका है।

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गौर करने वाली बार यह भी है कि जिले में बैठे जिम्मेदार अधिकारी भी शहर की गंदगी और अवस्थाओं को देखकर पूरी तरह चुप हैं। एक ओर आलाधिकारी कोरोना संक्रमण को लेकर चिंतित हैं वहीं Poor Waste Management से बढ़ते हुए इन्फेक्शन के खतरों को पूरी तरह नज़रंदाज़ कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि स्वच्छता सर्वेक्षण के विज्ञापनों पर लाखों रुपए बर्बाद करने वाली डबरा नगरपालिका ज़मीनी स्तर पर स्वच्छ डबरा बनाने के लिए क्या कदम उठाएगी।

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