MBBS कर चुके 1200 डॉक्टर्स की डिग्री पर मान्यता का खतरा, MCI ने दिया नोटिस

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ग्वालियर। प्रदेश के छह सरकारी और पांच मेडिकल कॉलेजों से MBBS कर इंटर्नशिप कर रहे 1200 डॉक्टर्स की डिग्री की मान्यता खतरे में पड़ गई है। ऐसा इस डॉक्टर्स के कारण नहीं हुआ बल्कि सरकारी लापरवाही का खामियाजा डॉक्टर्स भुगत रहे हैं  मेडिकल काउन्सिल ऑफ इन्डिया ने पत्र लिखकर सभी मेडिकल कॉलेज के डीन को इस सम्बन्ध में आगाह कर दिया है।

मध्यप्रदेश में 2014 में मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी बन जाने के बाद ग्वालियर, भोपाल जबलपुर सहित सभी छह सरकारी और पांच प्राइवेट कॉलेजों को उससे सम्बद्धता दे दी गई। लेकिन मेडिकल काउन्सिल ऑफ इण्डिया ने मेडिकल कॉलेज के डीन को लिखे पत्र में कहा कि किसी भी कॉलेज की मान्यता मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी से शो नहीं हो रही है। इसलिए इन कॉलेजों से MBBS कर इंटर्नशिप कर रहे 1200 डॉक्टर्स की डिग्री पर मान्यता पर खतरा है। पत्र में कहा गया कि इंटर्नशिप ख़त्म होने से पहले यदि यूनिवर्सिटी की मान्यता नहीं मिलती तो इनकी डिग्री का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा। उधर मेडिकल काउन्सिल ऑफ इण्डिया स्टूडेंट से एक शपथ पत्र भी भरवा रही है जिसमें स्टूडेंट को यह कहना पड़ रहा है कि यदि यूनिवर्सिटी को MCI की डिग्री नहीं मिलती है तो मुझे MCI में रजिस्ट्रेशन का अधिकार नहीं होगा। MCI के पत्र के बाद से घबराये स्टूडेंट को चिंता इस बात की है कि यदि जल्दी ही यूनिवर्सिटी की मान्यता नहीं मिली तो वे ना तो प्री पीजी एक्जाम दे पाएंगे और ना ही जूनियर या सीनियर रेजिडेंटशिप कर पाएंगे। इतना ही नहीं यदि डिग्री को मान्यता नहीं मिली तो वे प्राइवेट प्रेक्टिस भी नहीं कर सकेंगे। 

इन कॉलेजों के रजिस्ट्रेशन को खतरा

जीआर मेडिकल कॉलेज ग्वालियर, गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल, एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर, एनएससीबी मेडिकल कॉलेज जबलपुर, एसएस मेडिकल कॉलेज रीवा,बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर के अलावा चिराग मेडिकल कॉलेज भोपाल, इंडेक्स मेडिकल इंदौर, एलएन मेडिकल कॉलेज भोपाल, आरडी गार्गी मेडिकल कॉलेज उज्जैन और अरविंदो मेडिकल कॉलेज इंदौर ।

पूरे मामले पर जीआर मेडिकल कॉलेज ग्वालियर के डीन डॉ. भरत जैन का कहना है कि इंटर्नशिप छात्रों की डिग्री के रजिस्ट्रेशन के मामले में मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी जबलपुर से प्रक्रिया चल रही है हमने पूरी जानकारी यूनिवर्सिटी को भेज दी है । उधर मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ आरके शर्मा का कहना है कि अभी तक प्रदेश के मेडिकल कॉलेज अलग अलग यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध थे लेकिन अब मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी में आ गए है इसलिए प्रक्रिया में समय लग रहा है। डॉ शर्मा का कहना है कि इस बात के प्रयास तेजी से किये जा रहे हैं कि MCI की वेब साइट पर सभी मेडिकल कॉलेज हमारी यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध दिखे।