बेटियों ने दिया मां की अर्थी को कांधा, मुखाग्नि देकर निभाया बेटे का फर्ज

ग्वालियर। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का सन्देश देने वाले समाज में आज बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। आज कल बेटियां सभी वो फर्ज निभा रहीं हैं जो एक बेटा पूरा करता रहा है। ऐसा ही एक मामला ग्वालियर में देखने को मिला जहाँ चार बेटियों ने अपनी मां के देहांत पर शवयात्रा को ना केवल कांधा दिया बल्कि उन्हें मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज निभाया और समाज में फैली कुरूतियों से लड़ने का एक अच्छा संदेश दिया।

शहर के नई सड़क स्थित न्यू जौहरी कॉलोनी में रहने वाले प्रभाकर कान्हेरे की 82 वर्षीय पत्नी संध्या का शनिवार को निधन हो गया । बुजुर्ग दंपत्ति प्रभाकर और संध्या के चार बेटियां हैं लेकिन कोई बेटा नहीं है। गमगीन माहौल में संध्या की अंतिम यात्रा शुरू हुई तो बात निकली आखिर मुखाग्नि कौन देगा ? तभी चारों बेटियों वंदना घोरपड़े, नम्रता गंधे, स्वाति खोकले और तृप्ति डोंगरे ने निर्णय लिया कि बेटे का फर्ज वो निभाएंगी और समाज में बेटे-बेटी के अंतर को खत्म कर एक संदेश देंगी।

चारों बेटियों ने अपनी मां को कंधा तो दिया ही साथ ही  मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज निभाया। इस पल को देखकर मुक्तिधाम में मौजूद लोगों की आंखें भर आई। प्रभाकर और संध्या के दामाद भी मानते हैं  कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं होती । आज उन्हें गर्व महसूस हो रहा है कि उनका ऐसे परिवार से रिश्ता है जो दकियानूसी प्रथाओं के बंधन से दूर है।

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