DRDE के 200 मीटर के दायरे में हुए निर्माणों को रक्षा मंत्रालय ने माना अवैध, गिराए जायेंगे

ग्वालियर। शहर के झांसी रोड क्षेत्र में स्थित रक्षा मंत्रालय किन्प्रयोग शाला रक्षा अनुसन्धान एवं विकास स्थापना यानि DRDE के 200 मीटर दायरे में बने निर्माणों को गिराए जाने के मामले में शहर के लोगों और संस्थाओं को तगड़ा झटका मिला है। संसद में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि 2005 के बाद बने सभी निर्माण अवैध है और इन्हें हटाया जाएगा। साथ ही रक्षा मंत्रालय ने कहा कि फिलहाल DRDE को दूसरी जगह शिफ्ट करने की कोई योजना पर विचार नहीं किया जा रहा।

DEDE के आसपास 200 मीटर के क्षेत्र में कई  निर्माण ऐसे हैं जिन्हें तोड़े जाने को लेकर एक याचिका हाईकोर्ट में दायर हुई थी जिसकी सुनवाई में रक्षा संकर्म अधिनियम 1903 की धारा 3 के तहत इन्हें गिराए जाने की बात कही गई । प्रशासन ने इस पर कार्रवाई करते हुए इन निर्माणों को गिराना शुरू कर दिया सबसे पहले निजी संपत्तियां गिराई गईं। जबकि यहाँ सरकारी संपत्तियां भी बहुत है जो भी इस दायरे में हैं। कुल 9000 करोड़ की संपत्तियां इसकी उस हद में जिन्हें ढहाया जाना है। दरअसल 2005 में केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर ग्वालियर में प्रस्तावित DRDE की 200 मीटर के दायरे में कोई भी निर्माण प्रतिबंधित किया गया। अधिसूचना के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। यहाँ एक जनहित याचिका दायर की गई। जिसकी प्रारंभिक सुनवाई में कोर्ट ने अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाते हुए मध्यप्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को हल निकालने के लिए कहा। इसके बाद राज्यसभा सदस्य विवेक तनखा ने प्रधानमंत्री,रक्षामंत्री और मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग की ।

इस मामले में राज्यसभा में सांसद विवेक तनखा ने जब इस सम्बन्ध में सवाल किया तो रक्षा राज्य मंत्री श्रीपाद नाईक ने स्पष्ट किया कि  DRDE के 200 मीटर के दायरे में अधिसूचना जारी होने की दिनांक 17 सितम्बर 2005 के बाद बने सभी निर्माण अवैध हैं। जिन्हें हटाया जायेगा। DRDE को शिफ्ट करने के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि फ़िलहाल DRDE को कहीं शिफ्ट करने की कोई योजना नहींहै । रक्षा मंत्रालय के इस जवाब के बाद उन निजी संपत्ति स्वामियों की  को तगड़ा झटका लगा है जिन्हें थोड़ी उम्मीद थी। साथ यहाँ स्थित नगर निगम मुख्यालय, जीवाजी विश्व विद्यालय कैम्पस, रूप सिंह स्टेडियम सहित कई सरकारी संपत्तियों पर एक बार कार्रवाई की तलवार लटक गई है।