ग्वालियर-चंबल से कोई लिखेगा नई इबारत या शिवराज रचेंगे HISTORY

ग्वालियर।अतुल सक्सेना। ग्वालियर चंबल अंचल में ज्योतिरादित्य सिंधिया को राजनीति में जो सम्मान, शोहरत और ओहदा प्राप्त है वो किसी अन्य नेता को नहीं हासिल हो सका लेकिन इस परिवार के अलावा पिछले कुछ वर्षों में जो दमदार नाम उभरकर सामने आया वो है केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर। हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर अलग अलग पार्टी के होने के कारण धुर विरोधी रहे लेकिन दोनों ने अपनी मर्यादाओं का ध्यान रखा और कभी एक दूसरे पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की । अब चूंकि दोनों साथ आ गए हैं तो कयास लगने लगे है कि अब मध्यप्रदेश की नई इबारत इन दोनों दिग्गज नेताओं के आसपास लिखी जायेगी या शिवराज सिंह एक नया इतिहास रचेंगे।

कमलनाथ सरकार के गिर जाने के बाद मध्यप्रदेश में एक सवाल तेजी से सबके मन में दौड़ रहा है कि अगला मुख्यमंत्री कौन? भोपाल से लेकर दिल्ली तक भाजपा के बड़े नेता और रणनीतिकार चिंतन मनन में लगे हैं। अच्छी बात ये है कि कैडर बस पार्टी होने के कारण भाजपा का कार्यकर्ता अनर्गल बयानबाजी नहीं करता। भोपाल में जहाँ पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे,प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा, राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, नरोत्तम मिश्रा सहित कई बड़े नेता और पूर्व मंत्रीगण सरकार गठन और शाम को होने वाली विधायकदल की बैठक की तैयारी में लगे हैं तो दिल्ली में मुरैना सांसद और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का सरकारी बंगला भाजपा की रणनीति का केंद्र बना है। यहाँ केंद्रीय मंत्री तोमर के साथ केंद्रीय मंत्री प्रधान, ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित भाजपा के तमाम बड़े नेता भविष्य की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं । ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तोमर के बंगले के लॉन में बैठकर पत्रकारों के साथ बैठक नाश्ता भी किया। ग्वालियर चंबल के इस दोनों दिग्गज नेताओं का एक साथ फोटो शेषन भी हुआ जो इस समय सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

ग्वालियर-चंबल से कोई लिखेगा नई इबारत या शिवराज रचेंगे HISTORY

कौन होगा अगला मुख्यमंत्री सवाल पर सबकी चुप्पी

मध्यप्रदेश के साथ साथ देश के लिए भी ये सवाल सबसे बड़ा है कि प्रदेश में बनने वाली भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री कौन होगा? क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया, क्या नरेंद्र सिंह तोमर, क्या शिवराज सिंह चौहान या किसी अन्य नेता के सर पर सजेगा मुख्यमंत्री का ताज। सिंधिया समर्थक चाहते हैं सिंधिया को ये दायित्व उनको मिले लेकिन उन्होंने कहा कि जो पार्टी तय करेगी वो स्वीकार है उनका लक्ष्य टी जन सेवा है। उधर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी मीडिया से कहा कि भाजपा मध्यप्रदेश का कार्यकर्ता हूँ पार्टी मुझे जो दायित्व सौंपती है उस पूरा करने की कोशिश करता हैं। वहीं शिवराज सिंह भी कह चुके हैं कि जिसको पार्टी आदेश देगी उसका पालन होगा। बहरहाल भाजपा कैडरबेस पार्टी है इसलिए शीर्ष नेतृत्व के आदेश से पहले कोई कुछ नहीं बोलता। अब देखना होगा कि कांग्रेस की सरकार में मुख्यमंत्री नहीं बनाये जाने के बाद से शुरू हुई सिंधिया की लड़ाई को भाजपा अंजाम तक पहुंचाती है या नरेंद्र सिंह तोमर को उनकी मेहनत का इनाम मिलता है अथवा शिवराज सिंह एक बार फिर सरकार बनाकर नया इतिहास रचेंगे।