भगवामय हुआ ‘महाराज’ का महल, अब ये कांग्रेस नेता संभालेंगे ग्वालियर चंबल की कमान

ग्वालियर।अतुल सक्सेना।
ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद ग्वालियर चंबल संभाग का राजनीतिक समीकरण बदल गया है। जय विलास पैलेस के भगवामय यानि भाजपा के हो जाने और कांग्रेस सिंधियाविहीन हो जाने के बाद अब कांग्रेसियों के लिए इसके रास्ते पराये हो गए हैं। गई। ऐसे में अब कांग्रेस का सबसे ताकतवर नेता अपेक्स बैंक के चेयरमैन अशोक सिंह बन गए हैं। माना जा रहा है कि अब ग्वालियर चंबल संभाग में टिकट बंटवारे को लेकर मंथन अशोक सिंह के गांधी रोड स्थित आवास पर ही लिए जायेंगे।

कांग्रेस में कोई नियुक्ति हो या किसी भी चुनाव में टिकट वितरण ये सबकुछ अबतक सिंधिया के इर्दगिर्द घूमता था यानि इसमें सिंधिया गुट सब पर भारी रहता था लेकिन अब सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद ये स्थान रिक्त हो गया है और माना जा रहा है कि इस रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए सबसे सही नाम अशोक सिंह हैं। महल यानि जय विलास पैलेस अब भाजपा का हो गया अब तक महल के सबसे बड़े हिस्से पर केवल कांग्रेस दिखाई देती थी वहाँ भी भाजपा दिखाई देगी। जय विलास पैलेस में एक तरफ यशोधरा राजे का आवास है दूसरे बड़े हिस्से में ज्योतिरादित्य रहते हैं जबकि बाहरी हिस्सेएम माया सिंह रहती हैं ऐसे में माया सिंह और यशोधरा के साथ अब ज्योतिरादित्य के आवास पर भी भाजपाई ( सिंधिया समर्थक पूर्व कांग्रेसी) ही दिखाई देंगे। सिंधिया के कांग्रेस से जाते ही ग्वालियर चम्बल अंचल में दिग्विजय सिंह का दबदबा अचानक बढ़ गया है। कमलनाथ सहित अन्य गुटों का यहाँ प्रभाव नहीं होने से अब सबकुछ दिग्गी गुट के आसपास रहेगा और वर्तमान में अंचल में दिग्गी गुट को अपेक्स बैंक के चेयरमैन अशोक सिंह लीड कर रहे हैं। चार बार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके अशोक सिंह को कमलनाथ भी पसंद करते हैं। इसलिए ये तय माना जा रहा है कि सिंधिया के भाजपा में जाते ही अशोक सिंह का कद खुद ब खुद बढ़ गया जायेगा और कांग्रेस से जुड़े सभी फैसले गांधी रोड स्थित अशोक सिंह के आवास पर ही होंगे जिसे निर्देशित करेंगे दिग्विजय सिंह।

अशोक सिंह और सिंधिया का हमेशा रहा है टकराव

अशोक सिंह का परिवार ग्वालियर चंबल अंचल का इकलौता कांग्रेस परिवार रहा है जिसने हमेशा महल का खुलकर विरोध किया है। अशोक सिंह के दादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय कक्का डोंगर सिंह हो या अशोक सिंह के पिता पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह दोनों ने ही हमेशा खुद को महल और सिंधिया परिवार से दूर रखा। हालांकि अशोक सिंह ने ज्योतिरादित्य से अच्छे संबंध बनाने के प्रयास किये और कभी उनके या उनके परिवार के खिलाफ नहीं बोला बावजूद इसके वे कभी सिंधिया की पसंद नहीं बन पाए। पिछला लोकसभा चुनाव इसका बहुत बड़ा उदाहरण है जिसमें सिंधिया ने तीन बार की तरह एक बार अशोक सिंह को टिकट नहीं देने की बात पार्टी में की लेकिन कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, अरुण यादव, राहुल अजय सिंह सहित सभी वरिष्ठ कांग्रेसियों ने अशोक सिंह की पैरवी की और फिर राहुल गांधी ने अशोक सिंह का टिकट फाइनल किया। ये बात अलग है कि अशोक सिंह चुनाव हार गए लेकिन उनका वोट प्रतिशत बढ़ और हार का अंतर भी कम हुआ। और उनकी निष्ठा को देखते हैं पार्टी ने उन्हें अपेक्स बैंक का चेयरमैन बनाया। बहरहाल दूसरा कोई बड़ा कांग्रेसी चेहरा नहीं होने और दिग्विजय का खास होने के चलते अब सबकुछ अशोक सिंह के इर्द गिर्द घूमेगा। अब देखना ये होगा कि जो जिन सिंधिया समर्थकों ने श्रीमंत का साथ नहीं देते हुए खुद को सच्चा कांग्रेसी बताया है उस दिग्विजय और कमलनाथ गुट अपनाता है या नहीं।