प्रदेश में पहली बार : नाबालिग चला रहे थे गाड़ी, RTO ने पेरेंट्स का लाइसेंस किया निरस्त

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ग्वालियर। नाबालिग बच्चों को गाड़ी चलाने से रोकने के प्रशासन के कई प्रयासों के बाद भी पेरेंट्स उन्हें गाड़ी देना बंद नहीं करते । लेकिन इस बार प्रशासन ने ऐसी कार्रवाई की है कि पेरेंट्स अब गाड़ी देने से पहले 10 बार सोचेंगे। ग्वालियर में RTO ने दो पहिया वाहन से स्कूल आने वाले नाबालिग बच्चों के परिजनों को बुलाकर ना सिर्फ जुर्माना लगाया बल्कि उनके लायसेंस भी निरस्त कर दिए। गौरतलब है कि ऐसी कार्रवाई प्रदेश में पहली बार हुई है। 

दरअसल ग्वालियर RTO एमपी सिंह पिछले लम्बे समय से नाबालिग बच्चों को वाहन नहीं चलाने की हिदायत दे चुके हैं। कई बार सड़क पर ही पेरेंट्स को बुलाकर उन्हें फटकार भी लगा चुके हैं लेकिन फिर भी पेरेंट्स ने अपने नाबालिग बच्चों को दो पहिया वाहन देने बंद नहीं किये। नतीजा ये हुआ कि कई बार बच्चे खुद और कई बार बच्चों की वजह से दूसरे लोग दुर्घटना का शिकार हो गए। इसी आदत पर रोक लगाने के लिए RTO एमपी सिंह स्कूलों पर पहुंचे और जो नाबालिग बच्चे वाहन चलाते मिले उन्हें पकड़कर उनके परिजनों को मौके पर बुलाया और जुर्माना लगा दिया। 

जुर्माना लगाया, ड्राइविंग लायसेंस निरस्त 

परिवहन विभाग की टीम लक्ष्मीबाई कॉलोनी स्थित मिसहिल स्कूल पहुंची। यहाँ उसे 6 नाबालिग छात्र छात्राएं गाड़ी चलाते मिले। एमपी सिंह ने स्टूडेंट्स से उनके पेरेंट्स को वहां बुलवाया तो केवल दो ही पेरेंट्स वहां पहुंचे। RTO ने बिना लायसेंस गाड़ी चलाने वाले बच्चों के पेरेंट्स अक्षय नागर और अंजली राठौर पर एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया और उनके ड्राइविंग लायसेंस निरस्त कर दिए। 

प्रदेश में पहली कार्रवाई 

यहाँ बता दें कि मोटर व्हीकल एक्ट में किसी पालक का लायसेंस निरस्त करने की कार्रवाई प्रदेश में पहली बार हुई है। इसके अलावा RTO एमपी सिंह ने अन्य पेरेंट्स अशोक साहू, संजय अग्रवाल, प्रमोद शर्मा और कृष्ण पमनानी पर 3-3 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। RTO का कहना है कि यदि नाबालिग वाहन चलाते पकड़ा जाता है तो पेरेंट्स पर 25 हजार रुपए जुर्माना और 3 साल तक की सजा भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि शहर में ये कार्रवाई जारी रहेगी।

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