ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

कोरोना के कारण जारी लॉक डाउन में परेशान इंसानों की मदद के लिए सेंकड़ों हाथ रोज मदद के लिए बढ़ रहे हैं लेकिन बेजुबान जानवरों की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। लेकिन अब कुछ युवा इनकी मदद के लिए आगे आये हैं और इनकी भूख मिटाने का बीड़ा उठाया है।

लॉक डाउन ने इंसानों के साथ साथ जानवरों और पक्षियों को भी परेशान कर दिया है। शहरी क्षेत्र में तो यहाँ वहाँ ये बेजुबान अपने लिए भोजन पानी की जुगाड़ कर लेते हैं लेकिन शहर से दूर निर्जन, पिकनिक स्थलों पर रहने वाले जानवर परेशान हैं। पहले इन स्थानों पर लोग पिकनिक मनाने पहुँचते थे लेकिन लॉक डाउन के कारण अब यहाँ कोई नहीं पहुँच रहा। शहर के दो युवाओं को यहाँ के भूखे जानवरों की चिंता हुई तो ये इनके लिए भोजन लेकर निकल पड़े। शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर जंगल में बसा देव खो शहर के लोगों के लिए पिकनिक स्पॉट के साथ साथ एक धार्मिक स्थल भी है। छुट्टी वाले दिन शहर के लोग यहाँ पिकनिक मनाने पहुँचते हैं लेकिन लॉक डाउन के कारण यहाँ कोई नहीं पहुँच रहा।

सामाजिक कार्यकर्ता हरिमोहन को यहाँ रहने वाले सेंकड़ों बंदरों और पक्षियों के अलावा अन्य जानवरों की चिंता हुई तो अपने दोस्त पारस जैन के साथ मिलकर इनकी भूख मिटाने का निश्चय किया और करीब दो क्विंटल केले खरीदे और अपनी कार से पहुँच गए देव खो। हरिमोहन और पारस जैन जैसे ही यहाँ पहुंचे और बंदरों को केले देना शुरू किया तो बंदरों ने उन्हें घेर लिया और हाथ से ले लेकर केले खाने लगे। हरिमोहन ने एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ को बताया कि मैं कभी कभी यहाँ मंदिर पर दर्शन करने आता था लेकिन लॉक डाउन में नहीं आ पा रहा था अचानक मुझे यहाँ के बंदरों की चिंता हुई इसलिए मैं उनको भोजन कराने आ गया। उन्होंने कहा कि जल्दी ही मैं इसी तरह अन्य पिकनिक स्पॉट और निर्जन स्थानों पर जाकर भूखे बेजुबानों की भूख मिटाने का प्रयास करूँगा। हरिमोहन और पारस जैन का ये प्रयास निश्चय ही तारीफ करने योग्य है साथ ही ये इस बात का भी प्रमाण है कि आज का युवा जितने प्रगतिशील है उतना ही संवेदनशील भी है यानि पश्चिमी देशों की होड़ में भाग रही दुनिया की तरह वो तरक्की पसंद तो है लेकिन उसने भारत की सनातन परंपरा को नहीं छोड़ा।