गेस्ट हाउस की परमिशन पर बना लिया होटल रमाया, T&CP ने बंद करने के दिए निर्देश

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ग्वालियर। गांधी रोड पर आकाशवाणी तिराहे के पास बने होटल रमाया की मुश्किलें बढ़ने लगी  हैं। होटल द्वारा सरकारी नाले पर किये गए अतिक्रमण को कल सुबह प्रशासन ने हटा दिया और शाम ढलते ढलते टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने होटल रमाया के संचालकों को नोटिस थमा दिया। नोटिस में कहा गया है कि गेस्ट हाउस की परमिशन पर होटल बना दिया गया । जिसे तुरंत बंद किया जाए अन्यथा होटल को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। 

आकाशवाणी तिराहे पर मेला रोड पर बना होटल रमाया निर्माण के बाद से ही विवादों में है। सरकारी नाले की जमीन पर निर्माण को लेकर कई शिकायतकर्ताओं ने नगर निगम, जिला प्रशासन, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग सहित सरकार को शिकायत की लेकिन होटल पर कोई कार्रवाई नहीं गई, बताया जाता है कि होटल संचालक राम निवास शर्मा बड़े खनन कारोबारी हैं उनके भाजपा नेताओं से बहुत गहरे सम्बन्ध हैं । गौरतलब है कि होटल का निर्माण भाजपा शासनकाल में हुआ है और इसका उद्घाटन केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने किया था। और यही वजह रही कि शिकायतों पर सरकारी अमले ने गौर नहीं किया या कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटाई। लेकिन अब प्रदेश में सरकार बदलने के बाद शिकायतकर्ता सक्रिय हो गए । उसके बाद प्रशासन भी एलर्ट हो गया। कल सुबह जिला प्रशासन ने SDM अनिल बनवारिया की मौजूदगी में होटल द्वारा नाले की 840 वर्गफीट जमीन पर किये गए अतिक्रमण को हटा दिया। वहीँ शाम होते होते टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने होटल संचालक राम निवास शर्मा और राम शर्मा को नोटिस थमा दिया। संयुक्त संचालक द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि 4 नवम्बर 2011 को सर्वे क्रमांक 141 की 1050 वर्गमीटर जमीन पर आपके द्वारा गेस्ट हाउस की परमिशन प्राप्त की गई थी जिसके बेसमेंट में पार्किंग की भी परमिशन ली गई थी लेकिन इसके बदले आपके द्वारा होटल का संचालन किया जा रहा है। जो अपराध की श्रेणी में आता है इसलिए तत्काल प्रभाव से होटल का संचालन बंद कर दिया जाये ऐसा नहीं करने पर होटल को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि 26 मार्च 2018 को भी टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने एक नोटिया जारी कर व्यावसायिक गतिविधियाँ बंद करने के निर्देश दिए थे लेकिन मामला ठन्डे बस्ते में चला गया। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के संयुक्त संचालक वीके शर्मा का कहना है कि होटल संचालकों को अपना पक्ष रखने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है वरना वे न्यायालय में जायेंगे।