भूख से परेशान मजदूर घर से निकला टीवी बेचने, SDM ने दिखाई मानवता

ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

कोरोना महामारी की मार का असर दिहाड़ी मजदूर पर ज्यादा दिखाई दे रहा है। लॉक डाउन के चलते ये वर्ग सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। इसके पास खाने के पैसे नहीं है । हालांकि प्रशासन और स्वयं सेवी संगठन, समाजसेवी इनकी मदद के लिए आगे आ रहे हैं लेकिन अभी भी बहुत से लोग हैं जिनको मदद नहीं मिल रही। ऐसा ही एक उदाहरण शहर में उस समय देखने को मिला जब परिवार की भूख मिटाने के लिए एक मजदूर घर का टीवी सड़क पर बेचने निकल पड़ा।

कोरोना महामारी के चलते पहले जनता कर्फ्यू और फिर 21 दिन के लॉक डाउन ने धनी वर्ग को छोड़कर बाकी सभी की माली हालत बिगाड़ दी है। मध्यम वर्ग बुरे दौर से गुजर रहा और सबसे बुरे हालात निम्न वर्ग के है। रोज कमाने रोज खाने वाला इस गरीब वर्ग के पास खाने, राशन के लिए पैसे नहीं बचे हैं। हालांकि सरकार तीन महीने का राशन, उज्ज्वला योजना का मुफ्त सिलेंडर, मुफ्त गेहूं चावल, जनधन खातों में पैसा आदि की सुविधा मुहैया करा रही है बावजूद उसके बहुत से गरीब मजदूर ऐसे हैं जिन्हें दो वख्त का खाना नसीब नहीं हो पा रहा । ऐसा ही एक गरीब मजदूर ग्वालियर की सड़क पर भटकता मिला जो दो वख्त की रोटी जुटाने के लिए अपने घर का टीवी बेचने के लिए निकला था। मुरार के लाल टिपारा का रहने वाला ये मजदूर बहुत देर तक सड़क पर बैठा रहा लेकिन पास की मददगार खाना या राशन लेकर नहीं पहुंचा। हाँ कुछ लोग वीडियो बनाने जरूर पहुँच गए।

इसी बीच मुरार एसडीएम आरके पांडे वहाँ से निकले । वे लॉक डाउन के बीच सड़क पर टीवी लिए बैठे व्यक्ति को देखकर गाड़ी से उतरे और मजदूर के पास पहुंचकर उससे परेशानी पूछी और जानने के बाद उसे खाना खिलाया, उसके लिए राशन की व्यवस्था की और लॉक डाउन में घर पर ही रहने की सलाह देकर घर रवाना कर दिया। एसडीएम ने मजदूर से कहा कि टीवी बेचने की जरूरत नहीं है। इस परेशानी में जिला प्रशासन आपकी मदद के लिए तैयार है। बहरहाल एसडीएम ने संजीदगी दिखाते हुए एक गरीब की मदद कर मानवता का अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया लेकिन बड़ा सवाल ये है कि यदि कोरोना महामारी के चलते यदि लॉक डाउन जैसे हालात और लंबे खिंचे तो परिस्थितियाँ बहुत विषम हो जायेगी जिसकी चिंता सरकार को अभी से करनी होगी।