सिंधिया पर क्यों भड़के कमलनाथ

अतुल सक्सेना/ग्वालियर। प्रदेश सरकार के कामकाज को लेकर नाराज चल रहे कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया की नाराजगी आज उस समय और खुलकर सामने आ गई जब वे दिल्ली में मुख्यमंत्री कमलनाथ के आवास पर आयोजित कांग्रेस समन्वय समिति की बैठक को  वे बीच में छोड़कर चले गए। सिंधिया की इस नाराजगी का असर ग्वालियर पहुंचे मुख्यमंत्री कमलनाथ के चेहरे पर भी दिखाई दिया।

पत्रकारों से बात करते हुए कमलनाथ ने कहा कि समन्वय समिति में पंचायत चुनाव, नगरीय निकाय चुनाव और संगठन में परिवर्तन पर चर्चा हुई है। संगठन और सरकार में समन्वय नहीं होने के सवाल को सुनते ही सीएम कमलनाथ ने कहा कि मैं अध्यक्ष हूँ समन्वय किससे करना है। आम तौर पर शांत और सहज रहने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ सिंधिया से जुड़े उस सवाल पर भड़क गए जिसमें उन्होंने वादे पूरे नहीं होने पर सड़क पर उतरने की बात कही थी। सीएम ने तल्ख लहजे में कहा कि “तो उतर जाएं”। इतन कहकर उन्होंने ड्रायवार से कहा कि चलो और गाड़ी आगे बढ़ा दी। बहरहाल सिंधिया की बात पर सीएम कमलनाथ की इतनी तल्ख टिप्पणी के बाद प्रदेश से लेकर दिल्ली का सियासी पारा बढ़ने की संभावना हैं।

सुत्रों की माने तो मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार शाम को दिल्ली में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने सिंधिया की तरफ से राज्य सरकार पर किए गए हमले को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। सोनिया से मुलाकात के बाद कमलनाथ ने कहा कि मैंने पार्टी अध्यक्ष को बताया है कि सरकार घोषणापत्र के वादों को पूरा करने के लिए कितनी सक्षम है।पंचायत चुनाव और नगर पालिका चुनाव की तैयारियों और संगठन के मुद्दों को लेकर बातचीत हुई। वहीं सिंधिया के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि वचन पत्र पांच साल के लिए होता है, पांच महीने के लिए नहीं।