लॉक डाउन में राशन के लिए मारामारी, विधायक ने लगाए कालाबाजारी के आरोप

ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

केंद्र सरकार द्वारा गरीब परिवारों को तीन महीने का राशन मुफ्त दिये जाने की घोषणा के बाद राशन के लिए कंट्रोल की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई है और राशन के लिए मारामारी हो रही है। उधर कांग्रेस विधायक ने राशन की कालाबाजारी के गंभीर आरोप लगाए हैं जबकि खाद्य विभाग का कहना है कि भ्रम की स्थिति के कारण ये हालात बने हैं।

कोरोना वायरस के चलते घोषित 21दिन के लॉक डाउन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने गरीबों को तीन महीने का राशन मुफ्त दिया जाने की घोषणा की गई थी। घोषणा के बाद शहर का हर गरीब परिवार कंट्रोल की दुकानों की तरफ भागने लगा। हालात ये होने लगे कि सोशल डिस्टेंसिंग के आदेश की धज्जियां उड़ने लगीं और पुलिस बुलानी पड़ी। ग्वालियर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में भी ऐसे ही हालात बने। क्षेत्रीय विधायक प्रवीण पाठक ने बताया कि बहुत बड़ी समस्या है राशन बंट नहीं पा रहा। मेरे क्षेत्र की दुकानों से 10 प्रतिशत भी राशन वितरित नहीं हुआ। मैं खुद क्षेत्र में घूम रहा हूँ। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि एक दुकान में तीन तीन दुकान बना दी गई हैं जहाँ काला बाजारी हो रही है । कई बार कलेक्टर से कहा जा चुका है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। लेकिन मेरी चिंता ये है कि कोई भी गरीब भूखा ना सोये।

उधर इस मामले में जिला आपूर्ति नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन का कहना है, कि तीन महीने का मुफ्त राशन वितरण करने की घोषणा की गई है । लेकिन शहरवासियों में भ्रम की स्थिति बन गई है, लोगों में भ्रम पैदा हो गया है, पीडीएस की दुकान से सभी को फ्री राशन मिलेगा। इसलिए भीड़ बढ़ रही है। जबकि पीडीएस की दुकानों से सिर्फ पात्र लोगों को ही राशन का वितरण किया जाएगा जो पहले से राशन लेते आये हैं। उन्होंने बताया कि जिलेे में 555 पीडीएस की दुकानें हैं। इसमें 1,98,000 परिवार यानि 9,50,000 लोग शामिल हैं जो इसका लाभ लेते हैं। जून माह का राशन आ चुुका है। जो 10 अप्रैल से पीडीएस की दुकानों से माफत बंटना शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले सभी राशन कार्ड उपभोक्ताओं को राशन मिलता था लेकिन 2014 में खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बाद केवल अंत्योदय परिवार और प्राथमिकता परिवार जिसमें बीपीएल और अन्य 24तरह के परिवार के अलावा किसी को राशन नहीं दिया जाता। इस कानून के बाद एपीएल कार्ड धारक को अपात्र घोषित कर दिया गया था। बहरहाल जन प्रतिनिधि और जिला प्रशासन के अपने अपने तर्क हैं लेकिन हकीकत ये है कि लॉक डाउन में गरीब की हालत बहुत खराब हैं वो इससे कैसे उबर पायेगा ये बहुत बड़ा सवाल है।

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