महापौर पद जीतकर इतिहास बनाने वाली कांग्रेस का दावा, सभापति भी हमारा होगा, BJP ने कही ये बात

कांग्रेस प्रवक्ता धर्मेंद्र शर्मा का कहना है कि परिणाम आने के बाद हमारी संख्या 28 हो चुकी है,  उन्होंने कहा कि कांग्रेस की रीति नीति में विश्वास करने वाले कई निर्दलीय पार्षद भी हमारे साथ आएंगे। 

ग्वालियर, अतुल सक्सेना। ग्वालियर (Gwalior News) में भाजपा(BJP) की 57 साल पुरानी महापौर की कुर्सी को हासिल कर इतिहास बनाने वाली कांग्रेस (Congress) के हौसले बुलंद हैं। हालांकि पार्षदों के संख्या बल में भाजपा, कांग्रेस से अधिक है बावजूद इसके कांग्रेस का दावा है कि इस बार जैसे महापौर हमारा चुनकर आया है वैसे ही ग्वालियर के विकास के लिए परिषद् में सभापति भी हमारा ही होगा।

ग्वालियर महापौर सीट (Gwalior Mayor Election) के लिए हुआ चुनाव एक परिवार और पूरी सरकार की प्रतिष्ठा पर टिका था , जिसमें एक परिवार ने बाजी मार ली और भाजपा (Gwalior BJP) का 57 साल पुराना किला ढहा दिया। कांग्रेस (Gwalior Congress) की डॉ शोभा सिकरवार ने भाजपा की सुमन शर्मा को हराकर ना सिर्फ जीत हासिल की बल्कि भाजपा (BJP Madhya Pradesh) के उस भ्रम को भी तोड़ दिया कि कांग्रेस (MP Congress) अब ख़त्म हो गई है।

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कांग्रेस के दबंग विधायक डॉ सतीश सिंह सिकरवार की पत्नी तीन बार की पूर्व पार्षद डॉ शोभा सिकरवार (Gwalior Mayor Dr Shobha Sikarwar) ने जनता से विकास के नाम पर वोट अपील की थी, उनके साथ उनका परिवार था और कांग्रेस के कुछ गिने चुने कार्यकर्ता और पदाधिकारी थे फिर भी जनता ने उन्हें प्यार दिया।

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उधर भाजपा की सुमन शर्मा के साथ पूरी पार्टी थी, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर और राज्य सरकार के तमाम कैबिनेट और राज्य मंत्रियों ने सुमन शर्मा के लिए प्रचार किया। प्रदेश सरकार द्वारा किये विकास पर वोट मांगे लेकिन ग्वालियर की जनता ने उन्हें नकार दिया।

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अपनी जीत से उत्साहित कांग्रेस की नजर अब नगर निगम परिषद् की सभापति की कुर्सी पर है। इसके लिए उसने जोड़ तोड़ शुरू कर दी है।  महापौर सीट कांग्रेस के खाते में गई लेकिन उसके पास भाजपा की तुलना में कम पार्षद हैं।  भाजपा के 34 पार्षद चुनकर आये हैं लेकिन कांग्रेस के 25 पार्षद।

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इस आंकड़े के बाद भी कांग्रेस का दावा है कि परिषद् में सभापति उनका होगा। इस विश्वास और दावे की वजह बताते हुए कांग्रेस प्रवक्ता धर्मेंद्र शर्मा का कहना है कि परिणाम आने के बाद हमारी संख्या 28 हो चुकी है, क्योंकि तीन ऐसे पार्षद जो पार्टी के सिम्बोल के बिना निर्दलीय चुनाव लड़े थे वो हमारे साथ आ गए हैं। उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ले ली है  उन्होंने कहा कि कांग्रेस की रीति नीति में विश्वास करने वाले कई निर्दलीय पार्षद भी हमारे साथ आएंगे।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ देवेंद्र शर्मा ने भी दावा किया है कि महापौर के बाद अब सभापति भी कांग्रेस का होगा। उन्होंने कहा कि जब परिषद् में सभापति चयन की बात आएगी तो निर्दलीय सहित कुछ अन्य पार्षद ग्वालियर के विकास के लिए कांग्रेस का साथ देंगे।  उन्होंने कहा उनकी पार्टी निर्दलीय और दूसरे दलों के पार्षदों के संपर्क में है।

उधर भाजपा के जिला अध्यक्ष कमल माखीजानी इस बार भी आश्वस्त दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि संख्या बल में भाजपा कांग्रेस पर भारी इसलिए इस खेल में वो परास्त होगी। आपको बता दें कि वर्तमान स्थिति में महापौर कांग्रेस की है तो मेयर इन काउंसिल भी कांग्रेस की बनेगी लेकिन भाजपा के पार्षद अधिक होने के कारण परिषद् भाजपा की होगी।  ऐसे हालत में परिषद् में जब मुद्दे उठेंगे तो भाजपा और कांग्रेस के बीच तकरार होगी जिससे ग्वालियर का विकास प्रभावित होगा। बहरहाल अब सबकी निगाहें निर्दलीय, बीएसपी और भाजपा के उन पार्षदों पर है जिनकी दम पर कांग्रेस सभापति बनाने का दावा कर रही है।

ये ग्वालियर नगर निगम निर्वाचन का अंतिम परिणाम 

  • कुल वार्ड – 66
  • भाजपा के पार्षद चुनकर आये – 34
  • कांग्रेस के पार्षद चुनकर आये – 25
  • निर्दलीय पार्षद चुनकर आये – 6
  • बसपा का पार्षद चुनकर आया – 1