MP ELECTION: भितरघात के भय में भाजपा का गढ़ 

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ग्वालियर।  ग्वालियर को भाजपा का गढ़ कहा जाता है। इस धरती ने भाजपा को कई बड़े नेता दिए हैं जिनके नामों का उल्लेख करने की आवश्यकता भी नहीं है। इसीलिए चुनावों में यहाँ भाजपा कंफर्ट जोन में रहती है।  लेकिन इस बार परिदृश्य अलग दिखाई दे रहा है।  जो समीकरण इस समय बनते दिखाई दे रहे हैं उनमें जिले की लगभग सभी 6 सीटों पर भाजपा को भितरवार का भय दिख रहा है।  ये बात अलग है कि पार्टी का कोई भी बड़ा नेता इस बात को खुलकर स्वीकार नहीं कर रहा लेकिन अंदरखाने का सच यही है।  


ग्वालियर जिले में 6 विधानससभा सीटें- “ये हैं ग्वालियर ग्रामीण, ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व, ग्वालियर दक्षिण, भितरवार और डबरा” 

ग्वालियर ग्रामीण 

ग्वालियर ग्रामीण से भाजपा ने वर्तमान विधायक भारत सिंह कुशवाह को टिकट दिया है जिनके विरुद्ध मैदान में कांग्रेस के मदन सिंह कुशवाह हैं।  यहाँ पार्टी को कुशवाह वोट के बंटने का भय है। पिछले चुनाव में इस सीट से कांग्रेस ने गुर्जर को टिकट दिया था जिसके चलते उसे कुशवाह वोट पूरा मिल गया था। ये क्षेत्र कुशवाह और गुर्जर बाहुल्य है। लेकिन इस बार दोनों ही पार्टियों ने कुशवाह प्रत्याशी मैदान में उतार दिए है। जिसका नुकसान निश्चित ही भाजपा को होगा।  जबकि कांग्रेस से बगावत कर बसपा में गए साहब सिंह गुर्जर की नजर गुर्जर समाज के वोटों पर है।  वे अपने समाज के वोटों को अपनी झोली में मोड़ने के लिए जी जान लगा रहे हैं।   

ग्वालियर

ग्वालियर विधानसभा सीट पर भाजपा ने वर्तमान विधायक मंत्री जयभान सिंह पवैया को टिकट दिया है और कांग्रेस ने यहाँ से इसी सीट से पूर्व विधायक और पिछला चुनाव 10 हजार से ज्यादा अंतर से हारे प्रद्युम्न सिंह तोमर को टिकट दिया है । इस सीट पर वैसे तो सभी जाति और वर्ग के वोटर हैं लेकिन ये क्षत्रिय बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है।  यहाँ भी टक्कर पिछली बार की तरह दो क्षत्रिय प्रत्याशियों के बीच ही है।  लेकिन इस बार भाजपा को यहाँ से भितरघात का ख़तरा दिखाई दे रहा है।  सूत्रों की मानें तो यहाँ भाजपा के खेमे के कुछ नेता पार्टी के एक स्थानीय वरिष्ठ नेता के निर्देश पर गुपचुप तरीके से कांग्रेस प्रत्याशी की मदद कर रहे हैं।  यदि ये बात सही है तो निश्चित ही इससे भाजपा को बाद नुकसान हो सकता है।   

ग्वालियर पूर्व

ग्वालियर पूर्व विधानसभा सीट से भाजपा ने मंत्री माया सिंह का टिकट काटकर दो बार के पार्षद डॉ. सतीश सिंह सिकरवार को टिकट दिया है तो कांग्रेस ने  यहीं से पिछला चुनाव कुछ हजार वोटों से हारे मुन्नालाल गोयल को टिकट दिया हैं।  ये सीट भाजपा और सतीश सिकरवार दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है लेकिन भाजपा को यहाँ भी भितरघात  का भय मंडरा रहा है। सूत्र इस सीट पर भी वरिष्ठ नेता के निर्देश पर विरोधी खेमे को मदद की बात भरोसे के साथ कह रहे हैं। पार्टी से जुड़े अंदरुनी सूत्र कहते हैं कि इस बार ये सीट कांग्रेस की झोली में डाले जाने के प्रयास कुछ भाजपा नेताओं द्वारा किये जा रहे हैं।  

ग्वालियर दक्षिण

ग्वालियर दक्षिण विधानसभा सीट पर सबसे बड़ा पेंच दिखाई देता है।  यहाँ खुलकर बगावत कर मैदान में उतरी भाजपा की पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता ने सीधे तौर पर भाजपा प्रत्याशी वर्तमान विधायक मंत्री नारायण सिंह कुशवाह को चुनौती दी है। पार्टी को यहाँ सबसे अधिक भितरघात का भय है।  विशेष बात ये है कि यहाँ सिर्फ भाजपा को ही नहीं कांग्रेस को भी भितरघात का भय है क्योंकि कांग्रेस द्वारा उतारे गए प्रवीण पाठक जैसे नए चेहरे को वरिष्ठ नेता स्वीकार नहीं कर रहे। यहाँ से कई ब्राह्मण  नेता टिकट मांग रहे थे लेकिन सुरेश पचौरी गुट  के नए व्यक्ति को टिकट दिए जाने से ब्राह्मण भी नाराज है और उसका वोट भी कटेगा जिसका सीधा लाभ समीक्षा गुप्ता को होगा।  मंत्री नारायण सिंह कुशवाह अपने समाज के वोटों के भरोसे वैतरणी पार करने की सोचे बैठे है लेकिन भाजपा में रहते हुए पार्षद और फिर महापौर  के कार्यकाल के बहुत से समर्थक और नेता ऐसे हैं जिनकी आस्था समीक्षा के प्रति है लेकिन पार्टी अनुशासन के चलते वो इसे व्यक्त नहीं कर रहे लेकिन वे अंदर ही अंदर समीक्षा के पाले में ही हैं।  

भितरवार

भितरवार विधानसभा सीट पर बहुत संघर्षों के बाद टिकट हासिल करने वाले मुरैना सांसद अनूप मिश्रा यहाँ ब्राह्मण वोट के भरोसे ही हैं।  उनके लिए थोड़े सुकून की बात ये है कि उनके प्रबल विरोधी, इस क्षेत्र से विधायक रहे ब्रजेन्द्र तिवारी समाज के कहने पर इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे।  लेकिन ये कोई नहीं जानता कि वे अनूप  मिश्रा को बिना चुनाव लड़े नुकसान पहुंचाएंगे कि नहीं। वहीँ उनके सामने वर्तमान कांग्रेस विधायक लाखन सिंह भी कमजोर प्रत्याशी नहीं हैं, वे हमेशा लोगों के बीच रहते हैं , उनके संघर्ष में साथ रहते हैं।  वे यहां यादव और गुर्जर वोट के भरोसे हैं, हालाँकि उन्हें सभी जातियों और वर्ग का अभी समर्थन मिल रहा है। उधर अनूप मिश्रा को इस बार जीत की उम्मीद है लेकिन  ये तभी संभव होगा जब उनके साथ भितरघात बहुत कम हो।  

डबरा 

डबरा विधानसभा सीट पर वर्तमान कांग्रेस विधायक इमरती देवी मैदान में हैं उनके सामने भाजपा ने नए उम्मीदवार कप्तान सिंह सहसारी को मैदान में उतारा है जिसके चलते पार्टी कार्यकर्ता नाराज है , पिछला चुनाव इमरती देवी से हारने वाले सुरेश राजे ने भी भाजपा को छोड़कर कांग्रेस को ज्वाइन कर लिया है. यानि यहाँ पर सीधे तौर पर भाजपा को भितरघात को झेलना पडेगा। यही कारण है कि यहाँ से इमरती देवी अपनी जीत अभी से ही पक्की मानकर चल रही हैं।

यहाँ बड़ी बात ये है कि पिछले दिनों आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संघ ने जो सर्वे कराया है उसमें भी मालवा-निमाड़ एवं ग्वालियर- चम्बल में उसने खतरे की तरफ इशारा किया है। अब ये इशारा वोटर की नाराजगी हो सकती है या भितरघात , या दोनों ही कह नहीं सकते। अब आखिरी दिनों में भाजपा इन सबको कैसे मैनेज करती है ये देखने वाली बात होगी। लेकिन वर्तमान परिदृश्य को देखकर तो कहा जा सकता है कि इस बार ग्वालियर जिले की सीटों का परिणाम पिछली साल जैसा रहने की उम्मीद कम ही है।