कांग्रेस कार्यालय का बोर्ड ही उतार ले गया निगम का अमला, थाने पहुंचे कांग्रेसी 

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ग्वालियर।  लोकसभा चुनावों की तारीखों के ऐलान के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई और स्थानीय प्रशासन एक्शन मोड में आ गया।  ग्वालियर में भी नगर निगम ने नेताओं के होर्डिंग बैनर हटाने शुरू कर दिए, लेकिन हद तो तब हो गई जब निगम के मदाखलत अमले ने कांग्रेस कार्यालय पर लगा बोर्ड ही हटा दिया।  कांग्रेस ने इसकी शिकायत पुलिस में की है।  

आदर्श आचार संहिता का पालन करने के लिए सड़कों पर उतरा नगर निगम का अमला रात को शिंदे की छावनी पर स्थित कांग्रेस कार्यालय पर लगा पार्टी का बोर्ड ही उतार कर ले गया।  इस बात का पता सुबह उस समय लगा जब कार्यालय के स्थाई मंत्री दिनेश दुबे और जिला प्रवक्ता राजकुमार शर्मा कार्यालय पहुंचे।  जैसे ही दोनों की नजर बोर्ड पर गई तो वो गायब दिखा।  गौरतलब है कि 2003 से कांग्रेस कार्यालय पर ये बोर्ड लगा था।  तीन मंजिल वाले कांग्रेस कार्यालयमें बाहर की तरफ दो बोर्ड लगे थे जिनमें से एक गायब था।  राजकुमार शर्मा और दिनेश दुबे पहले कुछ समझ  पाए पर जब उन्होंने आसपास पूछा तो पता चला कि  ये काम नगर निगम के मदाखलत अमले का है। मामले की जानकारी वरिष्ठ नेताओं को देने के बाद उन्होंने इंदरगंज थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री कमलनाथ, गृह मंत्री बाला बच्चन, डीजीपी, आईजी ग्वालियर और एसपी ग्वालियर से कार्रवाई करने की मांग की है।  पुलिस को दिए शिकायती आवेदन में  कहा गया कि ये कार्यालय की निजी संपत्ति है इस पर पार्टी झंडा और बोर्ड लगाया अनुचित नहीं है।  कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाए कि भाजपा शासित नगर निगम के मदाखलत अमले ने जानबूझकर ये कृत्य किया। है  उधर नगर निगम कमिश्नर संदीप माकिन का कहना है कि मदाखलत अमला शहर में होर्डिंग, बैनर, फ्लेक्स हटाने की कार्रवाई कर रहा है।  हो सकता  है किसी  कर्मचारी से भूलवश ऐसा हो गया हो।  बहरहाल प्रदेश में कांग्रेस के शासन में उसके ही पार्टी कार्यालय से बोर्ड हटाने की घटना राजनैतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।