रिश्वतखोर रेलवे इंजीनियर को चार साल का सश्रम कारावास, ये है पूरा मामला

आवेदक मदन सिंह रेलवे इंजीनियर किशोर माहुलीकर के कार्यालय में जाकर उनसे मिले तो उन्होंने छज्जा नहीं तोड़ने के बदले 25,000/- रुपये की रिश्वत की मांग की।

Balaghat

ग्वालियर, अतुल सक्सेना। रिश्वतखोर(Bribe) रेलवे अधिकारी को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ग्वालियर ने चार साल के सश्रम कारावास की सजा (Rigorous imprisonment to railway engineer) सुनाई और अर्थदंड भी लगाया है। मामला 2014 का है, आवेदक ने एसपी लोकायुक्त कार्यालय में रेलवे इंजीनियर किशोर माहुलीकर द्वारा रिश्वत मांगे जाने की शिकायत की थी जिसके बाद लोकायुक्त ने रेलवे इंजीनियर को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार (Railway engineer arrested for taking bribe)  किया था।

दरअसल 20 अक्टूबर 2014 को हनुमान घाटी शिंदे की छावनी के पास रहने वाले मदन सिंह कुशवाह ने एपी लोकायुक्त कार्यालय ग्वालियर में शिकायत की कि उत्तर मध्य रेलवे ग्वालियर में पदस्थ वरिष्ठ खंड अभियंता यानि सीनियर सेक्शन इंजीनियर किशोर माहुलीकर के विरुद्ध एक शिकायत की थी जिसमें आवेदक ने कहा था कि उसका मकान श्योपुर – सबलगढ़ नैरोगेज लाइन के फाटक नंबर 6 के पास शिंदे की छावनी में है कुछ दिन पूर्व वे मेरे यहाँ आये हुए बोले कि तुम्हारे मकान का छज्जा रेलवे भूमि की हद में हैं मैं इसे ऐसे तोडूंगा कि पूरा मकान टूट जायेगा, मेरे कार्यालय में आकर मुझसे आकर मिलो।

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आवेदक मदन सिंह रेलवे इंजीनियर किशोर माहुलीकर के कार्यालय में जाकर उनसे मिले तो उन्होंने छज्जा नहीं तोड़ने के बदले 25,000/- रुपये की रिश्वत की मांग की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस (Gwalior Lokayukta Police) ने आवेदक को एक वॉइस रिकॉर्डर दिया और जब रिश्वत मांगे जाने के सुबूत हाथ में आ गया तो लोकायुक्त की टीम ने 29 अक्टूबर 2014 को इंजीनियर किशोर माहुलीकर को 20,000/- रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

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इंस्पेक्टर कवीन्द्र सिंह चौहान ने जाँच पूरी कर 17 मई 2015 को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ग्वालियर में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। न्यायालय में प्रकरण की पैरवी जिला अभियोजन अधिकारी लोकायुक्त ग्वालियर राखी सिंह ने की।  जिसमें आज 30 सितम्बर 2022 को न्यायालय  वरिष्ठ खंड अभियंता उत्तर मध्य रेलवे ग्वालियर को धारा 7 पीसी एक्ट 1988 में तीन साल का सश्रम कारावास और 2000/- रुपये अर्थदंड और धारा 13(1) डी 13 (2) पीसी एक्ट 1988 में चार साल का सश्रम कारावास और 2000/- रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।