खाली सरकारी जमीन पर फर्जी मकान दिखाकर कराई रजिस्ट्री, अब होगी FIR

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ग्वालियर। भ्रष्टाचार को आदत बना चुके बहुत से सरकारी कर्मचारी और अधिकारी कार्रवाई होने से भी नहीं डरते । ताजा मामला ग्वालियर जिले के दो गांवों की 60 हजार वर्ग फीट सरकारी जमीन पर कब्जे से जुड़ा है जिसमें कुछ दबंगों ने सांठगांठ कर इस जमीन पर आबादी और मकान दिखाकर 6 रजिस्ट्री करा ली। ग्रामीणों की शिकायत के बाद SDM ने जाँच कराई तो जमीन पर कोई मकान नहीं मिले। जिसके बाद सरपंच को पद से हटाने और फर्जीवाड़े में शामिल सभी लोगों  के खिलाफ FIR के लिए लिखा गया है साथ ही सभी 6 रजिस्ट्रियों को शून्य करने के लिए भी लिखा गया है।

दरअसल ग्वालियर नगर निगम सीमा से लगे नेशनल हाई वे पर बसे मिलावली और जिनावली गांवों की सरकारी जमीनों पर भू माफिया की लम्बे समय से निगाह है। पिछले दिनों कुछ दबंग लोगों ने इन दिनों गांव की 60 हजार वर्ग फीट खुली जमीन के अलग अलग हिस्सों में बसाहट दिखाकर 6 रजिस्ट्री करा ली। खास बात ये रही कि बिना भौतिक सत्यापन के ही डिप्टी रजिस्ट्रार ने जमीनों की रजिस्ट्री कर दी। लगभग 60 लाख रुपये कीमत की इस जमीन पर फर्जीवाड़े का पता ग्रामीणों को लगा तो उन्हों इ कलेक्ट्रेट में शिकायत की। शिकायत के बाद जब SDM प्रदीप सिंह तोमर ने नायब तहसीलदार धीरेन्द्र गुप्ता और राजस्व अमले की टीम से जांच कराई तो फर्जीवाड़ा उजागर हुआ यानि मिलावली और जिनावली गांव की जिस सरकारी जमीन पर मकान दिखाकर 6 रजिस्ट्री कराई गई वहां एक भी मकान नहीं था। जांच के बाद SDM ने रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी। रिपोर्ट में बताया गया कि मिलावली गांव के सर्वे नंबर 28/598 की 0.160 हेक्टेयर जमीन के कुछ हिस्से पर कुल चार रजिस्ट्री तीन महीने पहले ही की गई जबकि ये जमीन 6 अक्टूबर 2000 को ही अस्पताल के  लिए आरक्षित हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार जिनावली गांव के सर्वे नंबर 240 की  0.410 हेक्टेयर जमीन के कुछ हिस्से पर भी दो लोगों के नाम रजिस्ट्री हो चुकी है। ये फर्जीवाड़ा लोकसभा चुनाव के दौरान इतनी तेजी से किया गया कि किसी को भनक भी नहीं लगी। जांच के बाद SDM तोमर ने वर्तमान सरपंच महेश झा के खिलाफ धारा 40 के तहत पद से हटाने का प्रस्ताव CEO जिला पंचायत को भेजा है साथ ही विक्रेता और इस जमीन के सौदे में शामिल सभी लोगों के खिलाफ पुलिस में अपराधिक प्रकरण दर्ज करने के लिए भी पुरानी छावनी थाना प्रभारी को निर्देश दिए है। साथ ही सभी 6 रजिस्ट्रियों को निरस्त करने यानि शून्य घोषित करने के लिए भी पंजीयन कार्यालय को पत्र लिखा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान सरपंच महेश झा ने सरकारी जमीन पर रिहायशी मकान का प्रमाण पत्र जारी कर 2016 से 2019 तक के संपत्ति कर की रसीद काट दी। इसी तरह पूर्व सरपंच जलदेवी ने वर्ष 2011-12 और 2015-15 के बीच इस जमीन पर मकान मानकर संपत्ति कर की रसीद जारी कर दी। ग्राम सचिव की भूमिका भी रिपोर्ट में संदिग्ध पाई गई। उसने भी इन सरपंचों की मदद की। रिपोर्ट में जमीनों को बेचने का दोषी मिलावली के शैलेन्द्र सिंह,रायरू फार्म के शुभम राजपूत,नवीन अग्रवाल,मनोज जाटव जिनावली रायरू,भीकम सिंह जिनावली  कुलैथ और गुरुप्रीत सिंह हीरानगर पुरानी छावनी को बताया गया। जबकि दो डिप्टी रजिस्ट्रार की भूमिका पर भी सवाल खड़े किये है। डिप्टी रजिस्ट्रार कैलाश नारायण वर्मा ने बिना भौतिक सत्यापन किये जिनावली की एक और मिलावली की चार रजिस्ट्री कर दी इसी तरह डिप्टी रजिस्ट्रार संजय सिंह ने जिनावली में सरकारी जमीन पर रिहायशी भवन की घोषणा के आधार पर ही रजिस्ट्री कर दी। इन्होंने भी मौका मुआयना नहीं किया।