पिता के 33 साल पुराने सपने को पूरा करने सिंधिया ने की पहल, प्रशासन ने सरकार को प्रस्ताव भेजा

ग्वालियर । पूर्व केन्द्रीय मंत्री माधव राव सिंधिया ने 1986 में 1000 बिस्तर वाले जिस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की नींव रखी थी। उसके निर्माण की प्रक्रिया 33 साल बाद एक बार फिर शुरू हुई है। पिता के सपने को पूरा करने के लिए पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पहल की है। जिसके बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल का प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेजा है।

गोला का मंदिर चौराहे के पास  तत्कालीन रेल मंत्री एवं ग्वालियर सांसद माधव राव सिंधिया ने 1986 में शहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एक हजार बिस्तर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए  20 एकड़ जमीन आवंटित कराई। जमीन आवंटित कराने के बाद 10 जून 1989 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से इसका शिलान्यास कराया । शिलान्यास के समय इसका नामकरण इंदिरा गांधी चिकित्सालय रखा गया। ये अस्पताल सऊदी अरब के सहयोग से बनना था लेकिन कुवैत और ईराक युद्द के कारण इसका निर्माण अटक गया। कुछ समय तक ये जमीन ऐसे ही पड़ी रही फिर कुछ साल बाद ये जमीन हॉट लाइन इंडस्ट्रीज ग्रुप मालनपुर को अस्पताल बनाने के लिए दी गई। ग्रुप ने यहाँ मार्क अस्पताल बनाने के लिए काम शुरू किया। जमीन के। कुछ हिस्से पर स्ट्रेक्चर खड़ा भी किया गया लेकिन ग्रुप के घाटे में चले जाने के कारण उसने मालनपुर में अपनी इंडस्ट्री बंद कर दी इसके साथ ही अस्पताल का काम भी बंद कर  दिया। अस्पताल का निर्माण फिर कुछ साल अटक गया फिर 2002 में दिल्ली के एस्कोर्ट हॉस्पिटल से अस्पताल बनाने और संचालित करने के। लिए एमओयू पर चर्चा शुरू हुई लेकिन 2003 में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद भाजपा सरकार ने इस एमओयू को आगे नहीं बढ़ाया साथ ही  अस्पताल के निर्माण में  रुचि नहीं दिखाई। इसी के साथ अस्पताल के निर्माण का रास्ता फिर अटक गया। इतना ही नहीं इस जमीनों का आवंटन सरकारी विभागों को किया जाने लगा । मामला हाईकोर्ट में पहुंचा जिसके बाद सरकार को आवंटन निरस्त करने पड़े।

अब 15 साल सत्ता से दूर रहने के बाद प्रदेश में एक बार फिर कांग्रेस की सरकार है और ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पिता का सपना पूरा करना चाहते हैं। पिछले दिनों ग्वालियर आये ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पत्रकारों से कहा था कि जल्दी ही मार्क अस्पताल वाली जगह सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनेगा। उसके बाद जिला प्रशासन ने राज्य सरकार को इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा है। कलेक्टर अनुराग चौधरी का कहना है कि किसी कारण से गोले का मंदिर चौराहे के पास प्रस्तावित 1000 बिस्तर के निजी सुपर स्पेशलिटी  अस्पताल का निर्माण अटका  है। सरकार ने इसे बनाने में रुचि दिखाई है इसलिए इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा है । प्रस्ताव में कहा गया है कि जो भी ग्रुप ये अस्पताल बनाएगा उसे 30 प्रतिशत लोगों का इलाज मुफ्त और रियायती दरों पर करना होगा।

 

 

 

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