रिश्वरखोर सब इंजीनियर को 4 साल की सजा, 12000 का अर्थदंड

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ग्वालियर । मुरार स्थित कार्यपालन यंत्री कार्यालय में पदस्थ रहे सब इंजीनियर रविंद्र मोदी को भ्रष्टाचार निरोधी कोर्ट ने 4 साल की सजा सुनाई है। उन पर 12000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। खास बात यह है कि इस मामले में बिजली कंपनी का फरियादी बना ठेकेदार बाद में कोर्ट में अपने बयानों से मुकर गया था इसलिए न्यायालय ने उसके खिलाफ भी संज्ञान लिया है और अगली पेशी पर उसके खिलाफ नोटिस जारी किए जाएंगे। लोकायुक्त के अधिवक्ता अरविन्द श्रीवास्तव के मुताबिक  मुरैना के रहने वाले बिजली कंपनी के ठेकेदार नव 21 अगस्त 2014 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि वे ट्रांसफार्मर लगाने का काम करते हैं। जिसकी अनुमति कार्यपालन यंत्री के कार्यालय से दी जाती है। लेकिन प्रत्येक ट्रांसफार्मर में बिजली कंपनी के सब इंजीनियर र���िंद्र मोदी उनसे  8000 रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं । अनिल शर्मा को उस समय दतिया में तीन ट्रांसफार्मर लगाने थे। इसलिए मोदी ने उनसे 24000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। पहली किश्त के रूप में 12 हजार रुपए 22 अगस्त 2014 को दिए गए। खास बात यह है कि सब इंजीनियर मोदी ने रिश्वत की यह रकम सीधे हाथों में ना लेते हुए सामने रखी टेबल पर  रखवाई थी लेकिन उस समय कार्यालय में कोई भी मौजूद नहीं था इसलिए रिश्वत लेने का आरोपी उन्हें माना गया और 1 दिन पहले 21 अगस्त को ठेकेदार और मोदी के बीच हुई वार्तालाप को लोकायुक्त के वॉइस रिकॉर्डर में टेप किया गया था। इसे आधार मानते हुए मोदी के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में 12 हजार रुपए का जुर्माना किया गया है और 4 साल की सजा सुनाई गई है ।