अधिकारी को भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई के लिये डीजीपी और मुख्य सचिव से लगानी पड़ी गुहार

ग्वालियर। अतुल सक्सेना।

एंटी माफिया अभियान के तहत सरकार ने किसी को भू माफिया भी नहीं छोड़ने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बिना डरे कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं लेकिन ग्वालियर में इसे लेकर दो विभाग आमने सामने आ गये हैं। ग्वालियर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने महाराजपुरा थाने के टी आई की शिकायत मुख्य सचिव और डीजीपी से की । उनकी शिकायत के बाद से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामला वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुँचने के बाद टीआई ने मंगलवार को शिकायती आवेदन में बताये गए भू माफिया के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कर ली।

ग्वालियर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह ने महाराजपुरा थाने के टी आई आसिफ मिर्जा बेग पर भू माफिया के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के गंभीर आरोप लगाते हुए कुछ दिन पगले उनकी शिकायत मुख्य सचिव और पुलिस विभाग के मुखिया यानि डीजीपी से की । दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को लिखे शिकायती पत्र में सीईओ ने लिखा कि आवेदन और दस्तावेज देने के बाद भी टी आई भू माफिया के खिलाफ एफआईआर नहीं लिखते। पत्र में टी आई पर भू माफिया का साथ देने और उन पर कार्रवाई नहीं करने जैसे गंभीर आरोप लगाए ।

पुलिस मुख्यालय से ये पत्र सोमवार को ग्वालियर पहुंचा जिसके बाद ग्वालियर आईजी (एडीजीपी) राजाबाबू सिंह ने पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन से पत्र में दिए गए सभी शिकायती बिंदुओं पर जानकारी मांगी। मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचने के बाद इसका तत्काल असर हुआ और टीआई को एफ आई आर लिखनी पड़ी। एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ से बात करते हुए ग्वालियर विकास प्राधिकरण के सी ई ओ वीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मैंने वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की थी जिसके बाद महाराजपुरा टीआई ने एफ आई आर लिख ली है। अब कोई शिकायत नहीं हैं।

पत्र में इन बिंदुओं को बनाया गया शिकायती आधार

GDA के CEO ने मुख्य सचिव और DGP को टीआई की जो शिकायत की थी उसमें उन्होंने बिंदुवार कुछ प्रकरणों का उल्लेख किया था । पत्र में कहा गया कि 28 अगस्त 2019 को ग्वालियर गृह निर्माण समिति के अध्यक्ष हरिसिंह कुशवाह के खिलाफ एक आवेदन पर महाराजपुरा थाने में एफ आई आर दर्ज की गई लेकिन अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई। 4 दिसंबर 2019 को श्यामा गृह निर्माण समिति के अध्यक्ष सुरेश सिंह कुशवाह के खिलाफ फर्जीवाड़ा कर जीडीए की जमीन बेचने के मामले में एफ आई आर करने के लिए आवेदन दिया गया।

इस मामले में जीडीए के तीन अधिकारियों ने थाने के छह बार चक्कर लगाए जिसमें वो सभी दस्तावेज, रजिस्ट्री की सत्यापित प्रति लेकर पहुंचे लेकिन फिर भी टी आई ने अभी तक इसकी एफ आई आर नहीं की। इसके अलावा 5 फरवरी को कुंदन गृह निर्माण समिति 20 फरवरी को नवग्रह गृह निर्माण समिति के अध्यक्ष के खिलाफ एफ आई आर करने के लिए आवेदन दिया। जीडीए के अधिकारी जमीन से जुड़े दस्तावेज लेकर थाने भी गए लेकिन फिर भी टी आई ने एफ आई आर नहीं की।

बहरहाल मुख्य सचिव और डीजीपी से शिकायत के बाद भू माफिया के खिलाफ एफ आई आर तो गई लेकिन ये कई सवालों को जन्म दे गई।

मसलन मुख्यमंत्री के सख्त आदेश के बाद भी टीआई ने भू माफिया के खिलाफ एफ आई आर करने में लापरवाही क्यों दिखाई। इसके अलावा जीडीए के सीईओ ने एक टी आई की शिकायत मुख्य सचिव और डीजीपी जैसे वरिष्ठ अधिकारियों से क्यों कि जबकि जिले में कलेक्टर जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और आईजी, डीआईजी, एसपी जैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बैठते हैं। इन सब को ओवरलुक कर शिकायत भोपाल क्यों की गई। तो क्या ये माना जाए कि जीडीए के सीईओ को जिले के प्रशासनिक अधिकारियों पर भरोसा नहीं हैं। सरकार को इसपर गौर करना होगा।