यहां महापौर का पद खाली होने के बाद इन नेताओं ने पेश की दावेदारी

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ग्वालियर। नगरीय निकाय के चुनाव में भले ही कांग्रेस के 10 पार्षद चुनकर आएं थे, लेकिन अब उन्ही 10 पार्षद में से कुछ मनोनीत महापौर का सपना देखने लगे है। इसके पीछे कारण यह है कि महापौर शेजवलकर सांसद निर्वाचित हो चुके है ओर उन्होंने महापौर पद से इस्तीफा दे दिया है। अब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है ओर निकाय चुनाव को भी छह माह से कम का समय बचा है, ऐसे ेमें चुनाव तक सरकार या तो किसी पार्षद को महापौर पद पर मनोनीत कर सकती है या फिर किसी प्रशानिक अधिकारी का दायित्व दिया जा सकता है। कांग्रेस की सरकार होने के कारण मनोनीत महापौर के लिए कु छ पार्षद लॉबिंग करने में लगे हुए है।

चुनाव जीतकर तो कांग्रेसी लम्बे अर्से से महापौर बन नही सका, ऐसे में कुछ माह के लिए मनोनीत होने के लिए जरूर लॉबिंग शुरू हो गई है। तीन दिन पहले नेता प्रतिपक्ष कृष्णराव दीक्षित दिल्ली में सिंधिया से मिलने के लिए पहुंचे थे, लेकिन सिंधिया ने उनको समय ही नहीं दिया जिसके कारण वह वापिस लौट आएं थे। अब भोपाल में कृष्णराव दीक्षित की मुलाकात मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सिंधिया से करा तो दी है, लेकिन उन्होंने कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया इसके बाद दीक्षित को मंत्री सीएम कमलनाथ से भी मिलवाने ले गए थे। महापौर मनोनीत होने की दौड़ में फिलहाल कृषणराव दीक्षित ही मजबूत दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन अब इस दौड़ मे विकास जैन भी शामिल हो गए है। जैन के समर्थन में मंत्री इमरती देवी, लाखन सिंह यादव, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रामनिवास रावत एवं ग्रामीण अध्यक्ष मोहन सिंह राठोर लॉबिंग करने में लग गए है। सूत्र का कहना है कि दिल्ली में जब दीक्षित गए थे ओर सिंधिया से मुलाकात नहीं हुई थी तो वह निराश हो गए थे। इस दौरान सिंधिया से मिलने केपी सिंह भी पहुंचे थे जिनको सिंधिया ने बुलाकर बात की। केपी सिंह ने संकेत दिया है कि फिलहाल कोई मनोनीत महापौर नहीं होगा, क्योंकि इससे नगरीय निकाय के चुनाव में पूरा ठीगरा कांग्रेस के सिर फूट सकता है।

कृष्णराव दीक्षित एवं विकास जैन एक ही विधानसभा क्षेत्र से आते है। अब दोनो ही अलग-अलग गुट से जुड़े होने के कारण उनके नेता लॉंिबग करने में लगे हुए है। मंत्री जहां कृष्णराव को महापौर मनोनीत कराने पर जोर लगा रहे है वही विकास जैन जो सुनील शर्मा के समर्थक माने जाते है उनके लिए भी अब राजनीतिक गोटिया फिट कर दी गई है। दोनो नेताओ के बीच में से इस लड़ाई में कौन बाजी मारता है यह तो सरकार का निर्णय होने के बाद ही पता चलेगा।