-Three-times-loss-experience-will-be-benefit-to-Ashok-Singh-

ग्वालियर । कांग्रेस द्वारा प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक सिंह को ग्वालियर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाए जाने के बाद राजनैतिक पंडितों ने नफे नुकसान का गणित लगाना शुरु कर दिया है। जानकार मानते हैं कि अशोक सिंह पिछले तीन लोकसभा चुनाव हार चुके हैं जिसका लाभ उन्हें भाजपा प्रत्याशी की तुलना में जरूर मिलेगा क्योंकि भाजपा प्रत्याशी महापौर विवेक शेजवलकर को केवल शहर का मतदाता जानता है जबकि अशोक सिंह का ग्रामीण मतदाता से सीधा संपर्क है।   

ग्वालियर लोकसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस दोनों के प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद अब राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं । दोनों ही पार्टियां अपने अपने प्रत्याशियों की जीत के दावे करने लगी हैं इस बीच राजनीति के पंडित प्रत्याशियों की सक्रियता के आधार पर फायदा और नुकसान का गणित लगाने लगे हैं। जानकारों की राय पर भरोसा करें तो कांग्रेस प्रत्याशी अशोक सिंह भाजपा प्रत्याशी पर भारी पड़ सकते हैं क्योंकि वे लगातार तीन लोकसभा चुनाव हार चुके हैं और यही हार इस बार उनके लिए फायदे का सौदा साबित होगी। ग्रामीण प्रष्ठभूमि से आने वाले अशोक सिंह के पिता पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह ने भी ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत काम किया है। इसके अलावा अशोक सिंह जमीनों के व्यापार से भी जुड़े है जिसके चलते उनका ग्रामीण क्षेत्र में लोगों से सीधा संपर्क है। इसके अलावा होटल व्यवसाय से जुड़े होने और मृदुभाषी एवं मिलनसार होने के कारण वे शहर में भी उतना ही दखल रखते हैं, जो भाजपा प्रत्याशी विवेक शेजवलकर की तुलना में उन्हें फायदा पहुंचाने वाला दिखाई देता है। 

उधर भाजपा ने महापौर विवेक शेजवलकर को अपना प्रत्याशी बनाया है । राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महापौर होने के नाते शहरी क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी की पकड़ हो सकती है लेकिन  ग्रामीण क्षेत्र में उनका उतना दखल नहीं है। जो उनके लिए नुकसानदायी हो सकता है में हालांकि पार्टी स्तर पर वे इसे दूर करने के प्रयास में जुट गए हैं। भाजपा ने अभी से ग्रामीण क्षेत्र के नेताओं को जिम्मेदारी सौंप दी है । गौरतलब है कि  ग्वालियर लोकसभा सीट में ग्वालियर जिले की छह विधानसभा ग्वालियर, ग्वालियर दक्षिण, ग्वालियर पूर्व, ग्वालियर ग्रामीण, भितरवार और डबरा  और शिवपुरी जिले की दो विधानसभा पोहरी और करैरा आती हैं जिसमें से पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ग्वालियर लोकसभा सीट की आठ विधानसभाओं में से सात सीटों पर जीत दर्ज की जबकि भाजपा के खाते में केवल ग्वालियर ग्रामीण सीट ही है , इस हिसाब से भी विश्लेषक कांग्रेस का पलड़ा भारी मान रहे हैं।