लॉकडाउन में पुलिस के दो रूप, कहीं सख्ती तो कहीं संजीदगी

ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

पुलिस की वर्दी का खयाल आते ही एक लम्बा चौड़ा, कड़क दिखने वाले रौबीले व्यक्ति की तस्वीर आँखों के सामने आ जाती है लेकिन जब ये व्यक्ति असल में सामने आता है तो इसके अलग अलग रूप दिखाई देते हैं। कभी ये सख्त हो जाता है तो कभी ये संजीदा। ग्वालियर में भी लॉक डाउन के दौरान पुलिस के दो अलग अलग रूप दिखाई दिये।

कोरोना वायरस के कारण देशभर में लॉक डाउन है। लोगों को घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं है ऐसे में सबसे ज्यादा जिम्मेदारी पुलिस की है। बहुत से लोग मानते नहीं है तो उन्हें डंडे की भाषा में समझाना पड़ता है। कुछ शौकीन मिजाज लोगों को बेवजह सड़क पर तफरी करने में खुशी मिलती है तो पुलिस को चालानी कार्रवाई करनी पड़ती है। पुलिस की इतनी सख्ती और कोरोना जैसी महामारी के बीच समाज के दुश्मन अपनी आदतों से बाज नहीं आते, फिर पुलिस को उनसे भी निपटना पड़ता है और सख्ती करनी पड़ती है लेकिन यही कड़क पुलिस उस समय संजीदा हो जाती है जब कोई बेजुबान सड़क पर भूखा दिखाई देता है। लॉक डाउन के बीच ग्वालियर पुलिस की दो ऐसी ही तस्वीर दिखाई दी।

गिरवाई थाना पुलिस को सूचना मिली कि कोई गिरोह अवैध कच्ची शराब खपाने के लिए क्षेत्र में मौजूद है। मुखबिर की पिन पॉइंट सूचना पर पुलिस उस स्थान पर पहुंची लेकिन पुलिस के पहुँचने से पहले ही आरोपी भाग निकले, पुलिस के हाथ लगे शराबी जो धारा 144 और लॉक डाउन में शराब प्रतिबंधित होने के बावजूद खुले में शराब पी रहे थे। पुलिस ने ना सिर्फ इन्हें पकड़कर इनपर मुकदमा दर्ज किया बल्कि इनको मुर्गा भो बनाया। दूसरी तस्वीर इससे बिलकुल उलट है। कंपू थाने के टी आई विनय शर्मा क्षेत्र में राउंड पर थे उन्हें रास्ते में भूखी गायों का झुंड दिखाई दिया। ये गाये कचरा आदि खा रही थी। टी आई विनय शर्मा ने तत्काल मातहतों को हरे चारे की व्यवस्था करने के निर्देश दिये। थोड़ी ही देर में गाड़ी में भरकर हरा चारा पहुँच गया और भूखी गौमाता को अपनी मौजूदगी में टी आई साहब ने हरा चारा खिलवाया। बहरहाल ये दो अलग अलग तस्वीर जरूर है लेकिन इनमें एक चीज कॉमन है वो है सेवा भाव। पहली तस्वीर में समाज के प्रति सेवा भाव है और दूसरी में बेजुबान के प्रति। यानि ये सच है कि पुलिस की वर्दी पहना इंसान कड़क भी है तो संजीदा भी है।

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