ग्वालियर में गरजे विपक्ष के दिग्गज, बोले- मोदी-शाह से कोई डरने वाला नहीं

ग्वालियर।अतुल सक्सेना। CAA, NPR और NRC के विरोध में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, वरिष्ठ माकपा नेता सीताराम येचुरी और वरिष्ठ समाजवादी नेता ने ग्वालियर में कहा कि केंद्र कि सरकार देश कि जनता को डराना चाहती है लेकिन कोई डरने वाला नही है। येचुरी ने कहा कि गांधी जी के सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय जो अंग्रेजों ने कहा वही आज मोदी और अमित शाह कह रहे हैं। पत्रकार वार्ता में प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री डॉ गोविंद सिंह और अपैक्स बैंक के चेयरमेन अशोक सिंह भी मौजूद थे।

ग्वालियर के होटल सेंट्रल पार्क में आयोजित पत्रकार वार्ता को तीनों वरिष्ठ नेताओं ने संयुक्त रूप से संबोधित किया । मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि आपसे पूछा जायेगा कि आपके पिताजी कहां जन्मे, माताजी कहां जन्मी यदि नहीं बताया तो आप डाउटफुल कैटेगरी में आ जाएँगे और फिर आप अपनी नागरिकता प्रमाणित करने के लिए भटकते रहोगे। इसलिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने इसको लागू करने से इंकार कर दिया है । उन्होंने कहा कि इस कानून से एक सौ तीस करोड़ जनता प्रभावित होगी। ये केवल रोजगार और शिक्षा जैसी अन्य समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए ये किया जा रहा है ।

वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव ने कहा कि जब से सरकार आई है तब से लव जेहाद , हिंदू मुसलमान, नोटबंदी, जीएसटी जैसी चीजे हो रही जिसके चलते देश की जनता परेशान हैं । इस संविधान का मतलब है कि एक सौ तीस करोड़ लोगों के लिए सड़क, पानी, खेत खलिहान सबके लिए है । उन्होंने पत्रकारों से कहा कि आज आपके संस्थान के मालिक चौथा खंबा बन गए हैं जबकि आप हो चौथा खंबा। जबसे धरती बनी है जनता ही मालिक रही है। हमें संविधान बचाना है अपनी मिल्कियत बचानी है चाहें जान चली जाएं।

वरिष्ठ माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि व्यक्तिगत धर्म को नागरिकता के साथ जोड़ने की जरूरत नहीं है। CAA के साथ NPR और NRC का विरोध कर रहे हैं ।13 मुख्यमंत्रियोंने कहा है किअपने प्रदेश में से लागू नहीं करेंगे। देश के अंदर ध्रुवीकरण किया जा रहा है इस पर पुनर्विचार करने की जरूरत है।ये गरीबी हटाने का मकसद नहीं है गरीबों को हटाने का उद्देश्य है। उन्होंने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह आंदोलन गाँधी जी के सिविल डिसओबिडिएंट मूवमेंट का एक रूप है।यही बात उस समय ब्रिटिश सरकार करती थी कि कुछ भी हो जाए हैं पीछे नहीं हटेंगे। वहीं बात इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह कह रहे हैं । ये भी एक जन आंदोलन बन गया है जिसका मकसद संविधान को बचाना है। मोदी और शाह कुछ इतिहास से ही सीख लें