व्यापम फर्जीवाड़ा :सीबीआई ने 24 लोगों के खिलाफ पेश किये चालान

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ग्वालियर। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापम  प्री पीजी फर्जीवाड़ा मामले में सीबीआई ने 24 लोगों के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान पेश कर दिया है। जबकि 9 लोगों को उनके खिलाफ साक्ष्य नहीं मिलने के कारण इस केस से हटा दिया है। 4 साल तक चली जांच के बाद सीबीआई ने जिन लोगों को क्लीन चिट दी है। उनमें व्यापम के अध्यक्ष रहे सुधीर भदौरिया,  परीक्षा नियंत्रक डॉ. पंकज त्रिवेदी मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य रहे गुलाब सिंह किरार और ग्वालियर के कैंसर अस्पताल के संचालक डॉ. बीआर श्रीवास्तव के अलावा 5 और दूसरे लोग शामिल है। इनमें एक आरोपी रमेश वर्मा की मौत हो चुकी है। इसलिए उनका नाम इस केस से हटा दिया गया है। 

दरअसल ग्वालियर के झांसी रोड थाने में 2014 में प्री पीजी मामले में करीब 3 दर्जन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी परीक्षा अधिनियम तथा दूसरी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इनमें कई अभिभावक छात्र-छात्राएं और व्यापम के हाई प्रोफाइल अफसर शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच एसआईटी से लेकर सीबीआई को ट्रांसफर कर दी गई थी। 2015 से सीबीआई इस मामले में जांच कर रही थी । 4 साल तक चली जांच में सीबीआई को व्यापम के अध्यक्ष रहे सुधीर भदौरिया, परीक्षा  नियंत्रक पंकज त्रिवेदी, पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य रहे डॉ. गुलाब सिंह किरार और कैंसर अस्पताल के संचालक डॉ.बीआर श्रीवास्तव के खिलाफ सबूत नहीं मिले। जबकि डॉ. गुलाब के रिश्तेदार के बेटे शक्ति प्रताप किरार के खिलाफ वारंट विशेष कोर्ट से जारी किया गया है। 24 लोगों के खिलाफ चालान विशेष कोर्ट में लगाया गया है। यह सभी लोग 2010 -11 के प्रीपीजी  फर्जीवाड़े से जुड़े हुए हैं। आरोप है कि व्यापम के अफसरों छात्रों और उ��के अभिभावकों ने खाली ओएमआर शीट को बाद में गड़बड़ी करके छात्रों से भरवाया था। जिन लोगों के खिलाफ चालान पेश हुआ है उसमें शक्ति प्रताप किरार, विशाल यादव, गौरव भदौरिया,डॉ. रिचा जौहरी, व्यापम के अफसर योगेश्वर  उपरीत, इंदौर के डॉक्टर जगदीश सागर,अंकित वर्मा, नवीन शर्मा और जबलपुर के डॉ. एमएस  जौहरी के नाम शामिल हैं ।

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