LOKSABHA ELECTION: भीषण गर्मी से क्यों परेशान उम्मीदवार और प्रशासन

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ग्वालियर । ग्वालियर सीट पर मतदान का प्रतिशत बढ़ाने का संकल्प प्रशासन ने लिया है लेकिन यहां की भीषण गर्मी उसकी राह में रोड़ा बन सकती है, उधर राजनैतिक दल भी ग्वालियर की गर्मी के प्रकोप से वाकिफ हैं इसलिए वे भी थोड़े चिंतित हैं । ग्वालियर में मतदान 12 मई को होना है और मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक इस दिन तापमान 45 डिग्री के आसपास रह सकता है, यानि इस दिन सूरज की तपिश भरी किरणें शरीर को झुलसाने वाली होंगी । हालांकि जिला प्रशासन गर्मी से बचाव के ऐसे रास्ते खोज रहा है जिससे मतदाता को कोई तकलीफ ना हो। 

ग्वालियर संसदीय सीट पर 12 मई को मतदान होना है,लेकिन मार्च की विदाई और अप्रैल के पहले ही सप्ताह में ही गर्मी ने कोहराम मचाना शुरू कर दिया है, 29 मार्च को ही पारा 40 डिग्री के पाार जा पहुंचा जो जिला प्रशासन के लिये चिंताजनक है क्योंकि जिला प्रशासन इसबार मतदान का प्रतिशत 70 तक ले जाना चाहता है और गर्मी ने अभी ने अभी से संकेत दे दिए है कि 12 मई के आसपास बहुत तेज गर्मी रहने वाली है ऐसे में मतदान का प्रतिशत बढ़ाना जिला प्रशासन के लिए के लिए चुनौती बन गया है । पिछले रिकॉर्ड पर नजर डाले तो  2009 में 41.16 फीसदी और 2014 में मतदान का प्रतिशत 53 फीसदी रहा है, जिसकी मुख्य वजह रही ग्वालियर की भीषण गर्मी । इस बार जिला प्रशासन  53 फीसदी के रिकॉर्ड को तोड़कर मतदान का प्रतिशत 70 फीसदी तक ले जाना चाहता है, लेकिन इसमें भीषण गर्मी ने अभी से ही रुकावटें खड़ी करना शुरू कर दी है । जिसके चलते  प्रशासन ने गर्मी से बचाव के उपाय पर भी काम करना शुरू कर दिया है। गर्मी के तेवर को देखते हुए कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी अनुराग चौधरी ने  कर्मचारियों और मतदाताओं को गर्मी से बचाने के लिए पोलिंग बूथों पर मटकों का शीतल जल के साथ-साथ मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराने तैयारी के निर्देश निर्वाचन में लगे अधिकारियों को दिए हैं।  

मौसम विभाग का भी कहना है कि पहाड़ों से घिरा होने और राजस्थान से सटा होने के कारण ग्वालियर में अप्रैल, मई और जून में दूसरे शहरों की तुलना में ज्यादा गर्मी पड़ती है । आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ेगा जिसके कारण गर्मी चरम पर होगी  वहीं 12 मई के आसपास तापमान 45–46 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है और दोपहर में गर्म हवाएं चलने के आसार हैं।  उधर ग्वालियर की गर्मी से परिचित राजनीतिक दलों के नेताओं के अभी से पसीने छूट रहे हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि ग्वालियर संसदीय सीट पर आधे से अधिक मतदाता ग्रामीण क्षेत्र से हैं, जहां तापमान और अधिक रहता है, जिसके कारण मतदाता घर से बाहर नहीं निकलता ऐसे में उन्हें पता है कि अगर वोटिंग कम रहा तो किसी भी दल को हार का स्वाद चखना पड़ेगा ओर उस हार का एक बड़ा कारण गर्मी होगी, इसलिए राजनीतिक दलों ने जिला निर्वाचन अधिकारी से मांग की है कि मतदान के दिन सुबह और शाम का समय बढ़ाया जाए जिससे मतदान का प्रतिशत बढ़ाया जा सके।  अब देखना ये होगा कि जिला प्रशासन 2014 के 53 फीसदी मतदान के प्रतिशत में बढ़ोत्तरी कर पाता है कि ग्वालियर की गर्मी जिला प्रशासन के मंसूबों पर पानी फेर देगी जिसका असर नतीजों पर दिखाई देगा।