कोरोना मरीजों पर आयुर्वेदिक दवाओं के परीक्षण पर स्वास्थय विभाग ने लगाई रोक

मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण की स्थिति से निपटने और उसे काबू करने में जुटी सरकार ने बड़ा फैसला किया है। अब प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों पर आयुर्वेदिक दवाईयों का परीक्षण नहीं किया जाएगा।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (madhya pradesh) में कोरोना (corona) संक्रमण की स्थिति से निपटने और उसे काबू करने में जुटी सरकार ने बड़ा फैसला किया है। अब प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों पर आयुर्वेदिक दवाईयों का परीक्षण नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर रोक लगा दी है। आदेश में कहा गया है कि अंग्रेजी और आयुर्वेदिक दवाओं को एक साथ खाने से शरीर पर क्या असर पड़ेगा, इस संबंध में अभी कोई अध्ययन नहीं है। लिहाजा स्वास्थ्य विभाग ने इस पर रोक लगा दी है। ऐसे में अब मरीजों पर आयुर्वेदिक दवाओं का परीक्षण केंद्रीय आयुष विभाग की मंजूरी के बाद ही किया जाएगा।

दरअसल प्रदेश में आयुष अस्पतालों को भी कोविड केयर केंद्र बनाया गया है, जहां मरीजों को एलोपैथी के साथ आयुर्वेदिक व होम्योपैथी दवाएं भी दी जा रही हैं। कुछ जगह ट्रायल भी हो रहे हैं। लेकिन अब इस पर रोक लगा दी गई है। पिछले हफ्ते राज्य तकनीकी सलाहकार समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर यह आदेश सभी संबंधित अधिकारियों को जारी कर दिया गया है। आदेश के अनुसार अब कोरोना से संक्रमित मरीजों को आयुर्वेदिक काढ़ा और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाएं भी नहीं दी जाएंगी। जारी दिशा निर्देश में कहा गया है कि कई मरीजों को सामान्य बुखार होने पर जांच के दौरान रिपोर्ट में गंभीर बीमारी देखने को मिल रही है। ऐसे में बुखार को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता। मरीजों को होम आईसोलेशन में भी उस स्थिति में भेजने के निर्देश है जब सैंपल लेने या लक्षण दिखाने के सात दिन पूरा होने के बाद पिछले तीन दिन से बिना दवा खाए बुखार नहीं आया हो। पिछले चार दिन से मरीज का ऑक्सीजन का स्तर 95 फीसद से ज्यादा हो और सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं हो रही हो। बता दे कि मप्र में अब कोरोना संक्रमण के मामले में तेजी से कमी आ रही है। यहां नए मरीजों के मुकाबले रिकवरी रेट अधिक है।

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