दो भाइयों की मौत पर परिजनों के सवालों ने कर दिया है सबको हैरान

इंदौर| आकाश धोलपुरे| Indore news शहर के महावीर मार्ग गांधी नगर में रहने वाले 2 सगे भाइयों की मौत के बाद अब परिजन प्रशासन और डॉक्टर पर सवाल उठा रहे है। दरअसल, दोनों में से छोटे भाई को कोरोना संदेही मानकर अस्पताल ले जाया गया था और बाद में बड़े भाई को कोरोना संक्रमित (Corona POsitive) मानकर इलाज किया जा रहा था। हैरत की बात ये है कि दोनों ही भाइयों की रिपोर्ट निगेटिव आई है जिसके बाद लाचार परिजन एमवाय प्रशासन को हत्यारा मान रही है वही डॉक्टरो की माने तो वो हर एक का इलाज पूरी सावधानी के साथ कर रहे है।

बिलखती 85 वर्ष की बूढ़ी माँ की आंखों में अब दोनों बेटो के खोने का गम फिर भी वो मुश्किल घड़ी में मुंह फेर चुके पड़ोसियों और दुनिया की सलामती की दुआ कोरोना काल मे करती नजर आ रही है। वही विलाप करते बच्चे क्षेत्र के लोगो पर सवाल उठाने के साथ ही डॉक्टरों को हत्यारा बता रहे है और प्रशासन की कोविड व्यवस्था पर सवाल उठा रहे है।

दर्द भरी ये दास्तां इंदौर की उस हकीकत से रूबरू करवाने के लिए काफी है जिसमे कोरोना सैम्पल की जांच में लेटलतीफी हो रही है और हर मामूली बीमारी को आस पास वाले कोरोना मानकर शिकायत कर रहे है। बता दे कि इंदौर के गांधी नगर क्षेत्र में रहने वाले 47 साल के प्रॉपर्टी ब्रोकर ईश्वर वर्मा कोरोना के शुरुआती दौर में टायफाइड होने के बावजूद भी लोगों तक भोजन पहुंचाने जैसी व्यवस्था में लगे हुए थे इसी दौरान उनके हल्की छींक और खांसी आई जिसके बाद साथी समाज सेवियों ने उन्हें जांच के लिए कहा। इसके बाद क्षेत्र के किसी रहवासी ने कोरोना पॉजिटिव होने की शिकायत कर दी जिसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ईश्वर वर्मा को घर से ले गई। इसके बाद ईश्वर को एम. वाय. अस्पताल के चेस्ट वार्ड में भर्ती किया गया जहां उनका सैम्पल लिया गया और कोविड जांच के लिए पहुंचाया गया। इस बीच 4 अप्रैल को ईश्वर वर्मा ने दम तोड़ दिया। जांच रिपोर्ट के पहले मरीज के दम तोड़ने के कारण अस्पताल से ही ईश्वर के शव को शमशान ले जाकर 5 लोगो की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। मौत के बाद पता चला कि ईश्वर कोरोना वायरस से संक्रमित नही थे।

छोटे भाई के अनायास चले जाने के 2 दिन बाद एस्ट्रोलॉजर बड़े भाई विजय वर्मा ने गांधी नगर वार्ड 15 के बिजेओ पार्षद भगवान सिंह चौहान को आपबीती बताई और फ़ोन पर बताया कि चेस्ट वार्ड में कोरोना लक्षण वाले मरीजो को रखा जा रहा है ऐसे में जिनको कोरोना संक्रमण नही हो वो भी मरीजो के साथ रहकर संक्रमित हो सकते है। बड़े भाई ने ये भी बताया कि अस्पताल में कोरोना संक्रमण ना सिर्फ भर्ती मरीजो को घेर सकता है बल्कि उनके अटेंडर को भी और अस्पताल में कई लोगो की मौत वो अपनी आंखों से देख चुके है। इस पर पार्षद ने उन्हें भरोसा दिया कि वो उच्च अधिकारियों से बात करेंगे।

छोटे भाई की मौत के सदमे के बाद एक दिन अचानक बड़े भाई विजय वर्मा की तबीयत खराब हुई तो परिजन उन्हें एक निजी अस्पताल में ले गए जहां उन्हें निमोनिया बताया गया। इसके बाद विजय वर्मा को इंदौर के अरविंदो अस्पताल में कोरोना के लक्षण वाला मरीज मानकर एडमिट कर लिया गया। जहां बकायदा सैम्पल लिया गया और जांच रिपोर्ट में वो भी कोविड निगेटिव पाए गए लेकिन होनि को कुछ और ही मंजूर था और 20 अप्रैल को उनकी भी मौत हो गई। जिसके बाद फिर से परिजनों ने कुछ लोगो की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया। 15 दिनों के अंतराल में वर्मा परिवार के दोनों मुखिया और घर चलाने वालो कि मौत हो गई। इसके बाद शंका के आधार पर परिजनों को क्वारेंटाइन कर दिया गया। अब जब परिजन घर लौटे तो उनकी नाराजगी उस मतलबी समाज के खिलाफ निकली जो बुरे वक्त में किसी खलनायक से कम नही थे। परिवार की बेटियों का आरोप है कि प्रशासन का कोविड मैनेजमेंट ठीक नही है और एम.वाय. अस्पताल के डॉक्टरो ने पिता की हत्या कर डाली है। दोनों भाइयों की बेटियों के तर्क प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के लिए काफी है क्योंकि दोनो को पता है कि उनके पिता कोरोना के कारण काल के गाल में नही समाये है बल्कि दोषी तो कोई और है। बेटियों का आरोप ये भी है कि कोई बड़ा व्यक्ति कोरोना से मर जाता है तो सरकार पूरे परिवार की मदद में लग जाती है लेकिन उनके साथ तो कोरोना जैसी कोई बात ही नही थी बावजूद इसके प्रशासन उनके परिवार की सुध नही ले रहा है क्योंकि दोनों ही सदस्य परिवार का पालन पोषण करते थे और अब 8 सदस्यों के परिवार का जीना मुश्किल हो गया है।

क्षेत्रीय बीजेपी पार्षद (पूर्व) भगवान सिंह चौहान ने भी दोनों भाइयों की मौत के लिए प्रशासन को जिम्मेदार माना है और डॉक्टर व एम.वाय. अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए है। परिजनों द्वारा हत्या के आरोप लगाए जाने के बाद जब एमजीएम डीन डॉ.ज्योति बिंदल से बात की गई तो उन्होंने अब तक के आंकड़े सामने रख दिये। परिजनों के हत्या के आरोप को सिरे से नकार कर डॉ. ज्योति बिंदल ने बताया कि इस आपात घड़ी में शासकीय और निजी अस्पताल इलाज के लिए जी जान से मेहनत कर रहे है और न्यू चेस्ट वार्ड में 248 मरीजो का उपचार हुआ जिनमे से कोविड 9 मरीजों की मौत हुई है और ऐसा नही कहा जा सकता है कि हर मौत कोविड मरीजों की ही होती है। उन्होंने डॉक्टरो को फ्रंट लाइन फाइटर बताते हुए कहा उन पर ऐसे आरोप लगाना अनुचित है।

हकीकत क्या है इस बात का गवाह फिलहाल मिलना मुश्किल है लेकिन वर्तमान में एक परिवार का दर्द समाज का वो भयानक चेहरा है जो समय समय पर रंग बदल रहा है क्योंकि दोनों भाइयों की मौत के बाद बच्चो और परिवार ने मुखिया का साया और बूढ़ी माँ ने अपने बेटे खो दिए है फिर वो समाज के सलामत रहने का ही आशीर्वाद दे रही है।