यहां प्रति बच्चे पर एक शिक्षक, फिर भी हुए सब फैल

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इंदौर।

मध्यप्रदेश के स्कूलों में बच्चों की अच्छी शिक्षा व पढाई की बेहतर गुणवत्ता के नाम पर शासन द्वारा लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं लेकिन फिर भी जब बच्चों के परिणाम संतोषजनक नहीं आ पाता है। प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी होने के बावजूद प्रदेश के कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां प्रति छात्र पर एक शिक्षक है। लेकिन फिर भी वहां माशिम द्वारा घोषित परिणामों में संतुष्ट जनक देखने परीक्षा परिणाम को नहीं मिला। 

एक ऐसा ही मामला सामने आया है इंदौर जिले के जूना रिसाला क्षेत्र के शासकीय उर्दू हाई स्कूल का। यहां पांच छात्रों पर पांच शिक्षक थे फिर भी एक भी विधार्थी पास नहीं हो पाया। उन पांच छात्रों में से 3 फैल हो गए तो वहीं 2 छात्रों को पूरक आई है। विभाग के आला अधिकारी अभी इस बारे में समीक्षा करने की बात कह रहें हैं।

हालांकि इस इस सत्र में शासकीय स्कूलों में बच्चों की संख्या 5 से बढकर 23 हो गई है। शिक्षकों की बात करें तो यहां 1 प्राचार्य के साथ-साथ2 स्थायी शिक्षकों सहित 2 अतिथि शिक्षक बच्चों को पढाते हैं।

प्राचार्या दी सफाई 

खराब परीक्षा परिणाम आने पर स्कूल की प्राचार्य शोभा शुक्ला ने सफाई दी है और कहा है कि छात्र नियमित नहीं आते थे। इस वजह से 3 छात्रों को प्राइवेट परीक्षा भी देना पडा। हम समीक्षा कर रहे हैं। हमारे शिक्षकों ने तो उन्हें घर जाकर पढाने का प्रयास किया। जिन बच्चों को पूरक आई है वे गणित व विज्ञान में एक दो नंबरों से रह गए। हम छात्रों की रिटोटलिंग व पूरक परीक्षा भी दिलवाएंगे।

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