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इंदौर| चुनावी रणनीति के तहत भाजपा ने भले ही रविवार को लोकसभा सीटी के लिए शंकर लालवानी का नाम तय किया हो लेकिन उनका नाम बाहर आते हीे अब पार्टी में गुटबाजी का असर देखने को मिल रहा है।  पार्टी की ओर से ताई और भाई ने अपना चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया था जिसके बाद 17 उम्मीदवार सामने आए और दावेदारी जताने लगे लेकिन अंत में शिव के शंकर को टिकट मिला। इधर, टिकट मिलने के बाद से ही अंर्तद्वंद भी शुरु हो चुका है जिसके तहत पार्टी के पूर्व महापौर और कुशल संगठक कृष्णमुरारी मोघे के बयान ने साफ कर दिया है कि बीजेपी में अंदर ही अंदर कुछ चल रहा है। 

मोघे ने साफ किया कि मेरा नाम प्रमुखता के साथ में था, मैं इंदौर में महापौर रहा और लोग मेरी वर्किंग को पसंद करते थे जनता ने ही मेरा नाम आगे बढाया और जनता ही चाहती थी की मैं उम्मीदवार बनूं। उन्होने कहा कि अब जब टिकट घोषित हो चुका है तो पार्टी एकजुट होकर काम करेगी। वही कांग्रेस उम्मीदवार पंकज संघवी को महापौर चुनाव में हराने वाले मोघे ने कहा कि आज तक का इतिहास है पंकज कमल चुनाव चिन्ह के अलावा जीते नही है और इंदौर में अब कि बार फिर से इतिहास बनेगा। उन्होंने कहा इंदौर की सीट पर बीजेपी ही जीतेगी। वही उन्होने ये भी कहा कि इंदौर के टिकट पर केंद्रीय नेतृत्व ने विचार कर निर्णय लिया है और कार्यकर्ता पार्टी के लिए एकजुट होकर काम करेंगे|